29 जून को लेटाल गांव की गर्भवती सरिता देवी और उनके नवजात की एंबुलेंस में हुई मौत के मामले में अब तक जांच पूरी न होने से नाराज मृतका के पति नरेंद्र कुमार अपने दो मासूम बच्चों और मां के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वह पिंडर नदी में छलांग लगाने जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
लेटाल में परिजनों का आरोप
गौरतलब है कि 29 जून को प्रसव पीड़ा होने पर लेटाल गांव निवासी गर्भवती सरिता देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि महिला को करीब चार घंटे तक अस्पताल में रखा गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें कर्णप्रयाग के हायर सेंटर रेफर किया गया लेकिन कर्णप्रयाग पहुंचने से पहले ही रास्ते में एंबुलेंस के भीतर जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली के चिकित्सा स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि समय पर रेफर नहीं किया गया और एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी आवश्यक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
हालांकि घटना को लंबा समय बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं होने से पीड़ित परिवार में आक्रोश बढ़ता गया। इसी के विरोध में नरेंद्र कुमार अपने दो मासूम बच्चों और मां के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए।
उपजिलाधिकारी ने की चर्चा
धरने की सूचना मिलने पर उपजिलाधिकारी थराली यशवीर रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने नरेंद्र कुमार से बातचीत कर उन्हें समझाया और बाद में तहसील कार्यालय ले जाकर उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की।
नरेंद्र कुमार ने बताया कि घटना के इतने समय बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए फोन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुलाया गया था। लेकिन जब वह सुबह अस्पताल पहुंचे तो जांच टीम वहां मौजूद नहीं थी। उनके अनुसार दोबारा संपर्क करने पर भी जांच टीम ने आने की स्थिति स्पष्ट नहीं की और उन्हें गुमराह किया गया। इसी से आहत होकर उन्होंने अपने बच्चों के साथ थराली मोटर पुल पर धरना शुरू कर दिया।
प्रशासन से की मांग
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।