रुड़की : शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने और जाम की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2016 के अर्धकुंभ मेले के दौरान करीब 67 लाख रुपये की लागत से सात प्रमुख चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थीं। इनका उद्देश्य यातायात को व्यवस्थित करना सड़क हादसों पर अंकुश लगाना और शहरवासियों को सुगम आवागमन उपलब्ध कराना था। लेकिन समय के साथ यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह बेअसर साबित होती नजर आ रही है।
ट्रैफिक लाइटें वर्षों से बंद
वर्तमान में शहर के अधिकांश प्रमुख चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें वर्षों से बंद पड़ी हैं। जिन ट्रैफिक सिग्नलों से यातायात नियंत्रित होना था वे अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। नतीजतन चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह पुलिसकर्मियों की मौजूदगी या वाहन चालकों की समझदारी पर निर्भर है। व्यस्त समय में लोगों को लंबे जाम का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
इस मामले में नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि ट्रैफिक लाइटों की कई बार मरम्मत कराई जा चुकी है और उन्हें संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस के सुपुर्द भी कर दिया गया है। निगम का दावा है कि अपनी ओर से आवश्यक कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
तकनीकी समस्याओं के समाधान पर बल
वहीं ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि ट्रैफिक लाइटें तकनीकी रूप से पूरी तरह सुचारू नहीं हैं। कई स्थानों पर उपकरणों में खराबी है जिसके कारण उनका नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी समस्याओं के समाधान के बाद ही इनका प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।
दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी का सीधा असर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ट्रैफिक सिग्नल निष्क्रिय पड़े हैं और शहरवासी रोजाना जाम अव्यवस्थित यातायात और असुविधा का सामना करने को मजबूर हैं।
ट्रैफिक सिग्नलों को चालू कराने की मांग
शहरवासियों का कहना है कि यदि ट्रैफिक लाइटों का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाए तो चौराहों पर जाम की स्थिति काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। लोगों ने संबंधित विभागों से जल्द समन्वय स्थापित कर ट्रैफिक सिग्नलों को दोबारा चालू कराने की मांग की है ताकि वर्षों पहले किए गए लाखों रुपये के निवेश का वास्तविक लाभ आम जनता को मिल सके।