डोईवाला ब्लॉक की पहाड़ी ग्राम पंचायत गड़ूल का शीला चौकी क्षेत्र पिछले साल आई आपदा के दर्द से उबर नहीं पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब तक न तो टूटा हुआ पुल बनाया गया है और न ही नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा के स्थायी कार्य कराए गए हैं। ऐसे में हर मानसून के साथ ग्रामीणों की चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
देहरादून से महज 15 किलोमीटर दूर
उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित शीला चौकी क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। पिछले वर्ष आई आपदा में यहां भारी नुकसान हुआ था। आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ पुल नहीं बन सका है जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम नहीं होने से हर बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ते ही पूरे गांव में दहशत का माहौल बन जाता है। कई परिवार सुरक्षा के अभाव में गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं, जबकि जो लोग अब भी गांव में रह रहे हैं वे हर मानसून के दौरान जान-माल के खतरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने लगाया आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने पुल निर्माण और बाढ़ सुरक्षा कार्यों की मांग उठाई लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन दिए गए जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने अब आंदोलन का संकेत दिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण और बाढ़ सुरक्षा के स्थायी कार्य शुरू नहीं किए गए तो आगामी विधानसभा चुनाव में वोट मांगने आने वाले जनप्रतिनिधियों का विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होगा तब तक वे नेताओं से जवाब मांगते रहेंगे।
विकास के दावों पर सवाल
देहरादून से महज 15 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की स्थिति विकास के दावों पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर कब तक कार्रवाई करता है या फिर बढ़ती नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव में जनविरोध का रूप लेती है।