नववर्ष 2026 की शुरुआत धर्मनगरी हरिद्वार में विशेष रूप से भक्ति और आस्था के रंग में रंगी नजर आई। हरिद्वार, जो अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, में नए साल की पहली सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। सुबह होते ही हरिद्वार के कनखल स्थित प्राचीन दक्षेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। यहां पर देशभर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए। स्थानीय निवासी और अन्य राज्यों से आए भक्तों ने मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर नए साल की शुरुआत की। इन भक्तों ने न सिर्फ भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की बल्कि एक दूसरे से भी नववर्ष की शुभकामनाएं दी। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में इज़ाफा देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने न केवल मंदिर में पूजा अर्चना की बल्कि अपने घरों में भी धार्मिक अनुष्ठान किए। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दे रही थी। श्रद्धालुओं ने खासतौर पर भगवान शिव के समक्ष माथा टेककर अपने दुखों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति की कामना की।
आस्था की प्रधानता
हरिद्वार में नए साल की शुरुआत एक स्पष्ट संदेश दे रही है कि आस्था और विश्वास आज भी लोगों की पहली प्राथमिकता है। इस वर्ष के पहले दिन लोग अपने घरों से बाहर निकलकर भगवान के चरणों में सिर झुका रहे थे। यह दृश्य धर्मनगरी की सांस्कृतिक और धार्मिक समृद्धि को दर्शाता है, जहां हर व्यक्ति अपने जीवन की सुख-शांति के लिए भगवान की आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।
महत्वपूर्ण पहलू
दक्षेश्वर महादेव मंदिर की भव्यता और यहां की धार्मिक अनुष्ठान से यह प्रतीत होता है कि हरिद्वार में धार्मिक पर्यटन का बढ़ता प्रभाव है। यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह साबित करती है कि लोग आज भी अपने जीवन में आध्यात्मिक संतुलन और आस्था को महत्वपूर्ण मानते हैं। साथ ही, हरिद्वार में यह दृश्य साफ तौर पर दिखाता है कि धर्म और आस्था की परंपरा आने वाले समय में भी यथावत बनी रहेगी। इस धार्मिक उत्सव ने हरिद्वार के महत्व को और भी बढ़ा दिया है, और यह संदेश दिया कि नए साल की शुरुआत में लोग भगवान से सुख और समृद्धि की कामना करने के साथ-साथ अपनी आध्यात्मिक यात्रा को भी नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।
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