बांकुड़ा: पश्चिम बंगाल के जंगलमहल इलाके में जंगली हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बड़जोड़ा के बाद अब उत्तर बांकुड़ा वन प्रभाग के गंगाजलघाटी रेंज के अंतर्गत बांकदह गांव में दो जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। शनिवार आधी रात गांव में घुसे हाथियों ने एक घर की चहारदीवारी और लोहे का मुख्य गेट तोड़ दिया। इसके अलावा करीब एक क्विंटल सब्जियों और फसल को पैरों तले रौंदकर नष्ट कर दिया।
आधी रात घर के आंगन में पहुंचे दो हाथी
बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात जब बांकदह गांव के लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी जंगल की ओर से दो दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गए। दोनों हाथी स्थानीय निवासी बबलू घोष के घर के आंगन तक जा पहुंचे। हाथियों की गतिविधि से घर में अफरा-तफरी मच गई। शोर और परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने लाठी-डंडे और मशाल लेकर शोर मचाया, जिसके बाद हाथी वहां से जंगल की ओर चले गए।
लोहे का गेट और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त
ग्रामीणों के मुताबिक, जंगल की ओर लौटने से पहले हाथियों ने बबलू घोष के घर की चहारदीवारी के एक बड़े हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। मुख्य लोहे का गेट भी हाथियों की चपेट में आकर टूट गया। हाथियों ने घर के आसपास रखी और उगाई गई सब्जियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब एक क्विंटल कद्दू, बरबटी, झींगे, खीरा और मक्के की फसल पैरों तले रौंदकर नष्ट हो गई।
हाथियों के डर से शाम होते ही घरों में कैद ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से जंगली हाथियों की आवाजाही बनी हुई है। शाम ढलने के बाद हाथियों के अचानक गांव में आ जाने के डर से लोगों में भय का माहौल रहता है। स्थानीय छात्रा प्रियंका घोष और अन्य युवाओं ने बताया कि गांव की सड़कों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने के कारण रात में अंधेरा रहता है। हाथियों के डर से कई छात्र-छात्राएं शाम के समय ट्यूशन या पढ़ाई के लिए बाहर निकलने से भी बचते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से गांव में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने, रात में नियमित गश्त बढ़ाने और हाथियों की आवाजाही पर निगरानी रखने की मांग की है।
वन विभाग ने नुकसान के मुआवजे का भरोसा दिया
घटना की जानकारी मिलने के बाद गंगाजलघाटी रेंज के वनकर्मी मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। गंगाजलघाटी के रेंज ऑफिसर निलय राय ने बताया कि प्रभावित परिवार को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। वन विभाग की ओर से कर्मचारियों को पीड़ित परिवार के घर जाकर क्षति से संबंधित फॉर्म भरने और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जंगल से सटे गांवों के लोगों को रात के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जंगलमहल में बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष
बांकुड़ा और आसपास के जंगलमहल क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाथियों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश करने से जहां ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है, वहीं खेतों और घरों को भी नुकसान पहुंचता है। बांकदह की ताजा घटना के बाद ग्रामीणों ने रात के समय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।