कोलकाता: बारुईपुर दुष्कर्म मामले के आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस की गोली से हुई मौत अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। विपक्षी दलों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा ने साफ किया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
विपक्ष का मुख्य सवाल यह है कि पुलिस की कड़ी निगरानी में मौजूद आरोपी प्रभास मंडल आखिर पुलिस का हथियार कैसे छीनने में सफल हुआ। इस घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
भाजपा का बयान: अपराधी को नहीं मिलेगी राहत
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस मामले पर पुलिस मंत्री अपनी प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि जिसने हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध किए हैं, उसे कहीं भी छिपने नहीं दिया जाएगा। उनके अनुसार अपराधियों का स्थान केवल जेल के भीतर या मौत के बाद ही हो सकता है।
तृणमूल, वाम और कांग्रेस ने की आलोचना
हालांकि भाजपा ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट गुट, माकपा, कांग्रेस और नक्सलपंथी संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि मामले की पूरी जांच होने से पहले आरोपी की मौत कई सवाल खड़े करती है।
महुआ मोइत्रा ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि यह कानून का शासन नहीं बल्कि जंगलराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल अब "उत्तर प्रदेश-2" बन गया है। महुआ ने कहा कि प्रभास मंडल ने पुलिस हिरासत के दौरान "राजा" नाम के एक व्यक्ति का उल्लेख किया था। ऐसे में जांच पूरी होने तक आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी थी।
जांच और पुलिस कार्रवाई पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
प्रभास मंडल की मौत के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। अब सभी की नजर पुलिस जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।