बीरभूम: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में राजनीतिक दौरे के ठीक एक दिन बाद सुबह-सुबह बालू से लदे एक ट्रक के सड़कों पर गुजरने का मामला सामने आया है। बरसात के मौसम में नदी से बालू के खनन, उठाव और परिवहन पर सरकारी नियमों के तहत रोक होने के बावजूद ट्रक के खुलेआम गुजरने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बरसात में बालू खनन पर रोक, फिर भी सड़क पर ट्रक
सरकारी नियमों के मुताबिक बरसात के मौसम में नदियों से बालू के खनन और उसके उठाव पर रोक रहती है। इसके साथ ही बालू की लोडिंग और परिवहन को लेकर भी प्रशासन की ओर से कड़े नियम लागू किए जाते हैं। इसका उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण को नुकसान से बचाना है। इसके बावजूद बीरभूम में बालू से लदा ट्रक सड़क पर दिखाई देने से नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है। आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद बालू का परिवहन जारी रहने से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। मामले ने एक बार फिर जिले में कथित बालू माफिया के प्रभाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चालक से पूछताछ में नहीं मिले स्पष्ट जवाब
बताया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी के बीरभूम दौरे के एक दिन बाद सुबह बोलपुर की सड़क पर बालू से लदा एक ट्रक गुजर रहा था। मौजूद लोगों ने ट्रक चालक से बालू के स्रोत को लेकर सवाल किया। चालक ने बताया कि बालू खयराशोल से आ रहा है। हालांकि, जब उससे पूछा गया कि बालू वास्तव में किस जगह से उठाया गया है, तो वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। उससे बालू के परिवहन से जुड़े दस्तावेज और अनुमति पत्र भी दिखाने को कहा गया। लेकिन चालक इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद वह ट्रक लेकर वहां से निकल गया। घटना के बाद बालू के स्रोत और उसके परिवहन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
दस्तावेज नहीं होने से बढ़ा संदेह
नियमों के अनुसार पहले से भंडारित बालू को भी प्रशासन की अनुमति और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही बेचा और परिवहन किया जा सकता है। ऐसे में ट्रक चालक द्वारा संबंधित दस्तावेज नहीं दिखा पाना पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है। सवाल उठ रहा है कि ट्रक में लदा बालू आखिर कहां से आया था। क्या इसे किसी नदी से उठाया गया या किसी दूसरे स्थान पर पहले से भंडारित बालू को ले जाया जा रहा था। अगर बालू पहले से भंडारित था, तो उसके परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति और कागजात कहां हैं। वहीं, अगर बालू नदी से उठाया गया था, तो बरसात के मौसम में प्रतिबंध के बावजूद यह कैसे संभव हुआ। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सुबह की रोशनी में सामने आया मामला
इस पूरे मामले की सबसे अहम बात यह है कि बालू से लदा ट्रक रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि सुबह के समय खुलेआम सड़क पर दिखाई दिया। इससे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। अगर बालू के खनन और परिवहन पर रोक है, तो सड़क पर ऐसे ट्रकों की निगरानी क्यों नहीं हो रही है। वहीं, वैध दस्तावेजों के बिना कोई ट्रक बालू लेकर आगे बढ़ रहा था तो उसे रास्ते में जांच के दौरान क्यों नहीं रोका गया। मामले ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बालू के स्रोत और ट्रक के दस्तावेजों की जांच की जाती है या नहीं।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
बीरभूम में बालू के अवैध खनन और परिवहन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ताजा मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। बरसात के मौसम में लागू प्रतिबंध के बावजूद यदि बालू का परिवहन हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। स्थानीय स्तर पर यह पता लगाना जरूरी होगा कि ट्रक को बालू कहां से मिला और उसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके अलावा परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की वैधता की भी जांच आवश्यक है। यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ सकती है। फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई या आधिकारिक बयान का इंतजार है। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस पूरे मामले में क्या सच्चाई सामने आती है।