कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब कानूनी गलियारों में भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मंगलवार को बीजेपी समर्थक वकीलों ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
नई कानूनी टीम के गठन तक मोहलत की मांग
बीजेपी समर्थक वकील सुस्मिता साहा दत्त ने अदालत से अनुरोध किया कि राज्य सरकार से संबंधित मामलों में फिलहाल कोई भी फैसला (पक्ष या विपक्ष में) न सुनाया जाए। वकीलों का तर्क है कि राज्य में अब प्रशासनिक और राजनीतिक परिवर्तन हो चुका है, जिसके कारण पिछली सरकार के वकील अब प्रभावी नहीं रह गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई सरकार को सरकारी वकीलों का अपना पैनल तैयार करने में कुछ समय लगेगा।
मुख्य न्यायाधीश की प्रतिक्रिया
बीजेपी की ओर से इस सक्रियता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल ने वकीलों को आश्वासन दिया कि अदालत इस आवेदन पर विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत मुकदमों की विषय-वस्तु (Subject Matter) को देखने के बाद ही दी जाएगी।
15 साल बाद कानूनी परिदृश्य में बदलाव
पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद, बीजेपी अब नई सरकार बनाने की तैयारी में है। शपथ ग्रहण और नई कैबिनेट के गठन की औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है। ऐसे में बीजेपी समर्थक वकील यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नई सरकार के आने तक कोर्ट में राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के लिए नई टीम मौजूद रहे।