कोलकाता: राज्य में बंगला सहायता केंद्रों (BSK) की भूमिका पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पंचायत एवं पशु संसाधन विकास मंत्री दिलीप घोष ने इन केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि राज्य भर में संचालित इन केंद्रों का उपयोग घुसपैठियों को फर्जी सरकारी दस्तावेज दिलाने के लिए किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।
कॉमन सर्विस सेंटर के कार्यक्रम में मंत्री का बड़ा बयान
शुक्रवार को कोलकाता के धनधान्य ऑडिटोरियम में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के 17वें वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने इन अनियमितताओं का खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सहायता केंद्रों के माध्यम से अवैध रूप से वोटर आईडी और [सरकारी पहचान पत्र रेडाक्टेड] जैसे दस्तावेज बनवाए गए हैं। मंत्री ने दावा किया कि इनमें से कई लोग कथित तौर पर देशविरोधी गतिविधियों में भी संलिप्त हैं।
"केंद्रों का नए सिरे से हो चयन और पारदर्शी जांच"
दिलीप घोष ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद और घुसपैठ जैसी चुनौतियों के मद्देनजर इस तरह की अनियमितताओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि बंगला सहायता केंद्रों के कामकाज की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए। उन्होंने प्रस्ताव रखा है कि इन केंद्रों का नए सिरे से चयन किया जाना चाहिए और जांच के बाद इन्हें कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के साथ जोड़कर फिर से संचालित किया जाए।
सरकारी योजनाओं में धांधली का आरोप
मंत्री ने घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में 91 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन लोगों ने लक्ष्मीर भंडार, आवास योजना और जॉब कार्ड जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया है। मंत्री का तर्क है कि इस धांधली के कारण राज्य के असली और योग्य लाभार्थी अपने हक से वंचित हो रहे हैं।
पारदर्शी व्यवस्था की वकालत
दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई राज्य की सुरक्षा और वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों के लिए है। उन्होंने कहा कि जिन केंद्रों पर फर्जीवाड़े के आरोप हैं, उनकी व्यापक जांच होनी चाहिए ताकि घुसपैठियों पर लगाम कसी जा सके। यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।