मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को अपने बहुमत का भरोसा है, इसलिए किसी भी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का उस पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार को तब ज्यादा दबाव महसूस होता है, जब किसी आंदोलन का सीधा राजनीतिक असर चुनावों पर पड़ने की संभावना होती है। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय सरकार को कई बार बातचीत के लिए आगे आना पड़ा था।
"आंदोलन से फर्क नहीं पड़ रहा, क्योंकि सरकार के पास संख्या बल है"
कांग्रेस नेता ने कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति या संगठन आंदोलन करे, सरकार को फिलहाल राजनीतिक नुकसान का डर नहीं दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, सरकार संसद में अपने समर्थन और संख्या बल को लेकर आश्वस्त है, इसलिए वह आंदोलनों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज और आंदोलनों का महत्व होता है, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया कई बार राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
किसान आंदोलन का दिया उदाहरण
अधीर रंजन चौधरी ने किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि मामला चुनावी समीकरण और वोट बैंक से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने कई दौर की बातचीत की और बाद में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया गया था। कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में मौजूदा हालात की तुलना की।
सोनम वांगचुक का आंदोलन किस मुद्दे पर?
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपने आंदोलन के जरिए लद्दाख से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। वांगचुक के आंदोलन को लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग उनके मुद्दों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल इस मामले पर अपने-अपने नजरिए से बयान दे रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अधीर रंजन चौधरी के बयान के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार पर जन आंदोलनों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार की ओर से नीतियों और फैसलों को लेकर अपना पक्ष रखा जाता रहा है। फिलहाल सोनम वांगचुक के आंदोलन और उस पर हो रही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर चर्चा जारी है।