कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति, उत्तर 24 परगना के गायघाटा में रेप के आरोपी के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने और आगामी नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने कड़ा रुख अपनाया है। गायघाटा में 11वीं की छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के मामले में क्राइम सीन री-क्रिएशन के दौरान भागने की कोशिश कर रहे आरोपी के एनकाउंटर को उन्होंने सही ठहराते हुए कहा कि समाज में शांति और कानून का राज कायम करने के लिए अपराधियों में डर होना बहुत जरूरी है।
गायघाटा एनकाउंटर और कानून का खौफ: 'पुलिस पर जनता का भरोसा लौटना चाहिए'
गायघाटा एनकाउंटर पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि पहले बारुईपुर में भी ऐसी घटना हुई थी, जहां आरोपी ने भागने की कोशिश की और एनकाउंटर हुआ। उन्होंने कहा, "दुष्कर्मियों के मन में डर पैदा करना होगा। यह एक दिन में नहीं होगा, लेकिन ऐसी सख्त कार्रवाइयों से धीरे-धीरे बदमाशों में खौफ पैदा होगा। कानून के सामने सभी को झुकना होगा और कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि कोई कानून तोड़ेगा और पुलिस की बंदूक छीनकर भागेगा, तो उसके साथ ऐसा ही अंजाम होगा। पुलिस पर आम जनता का भरोसा लौटाने के लिए ऐसे कड़े कदम उठाने ही पड़ते हैं। कानून का राज स्थापित होगा तो अपराध करने वाले अपने आप सतर्क हो जाएंगे।"
दलबदल और निकाय चुनाव: 'कौस्तव बागची खुद कांग्रेस से आए हैं'
टीएमसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर कौस्तव बागची के विरोध वाले बयान पर पलटवार करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि कौस्तव खुद कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं। चुनाव से पहले किस दल से किसे लेना है, यह फैसला पार्टी नेतृत्व सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही करता है। इसलिए इस पर किसी को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। वहीं भाजपा के ड्रॉपबॉक्स पर उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के उत्साह से बॉक्स पूरी तरह भर चुका है। टीएमसी के कुछ नामों के भाजपा में आने की उड़ रही अफवाहों को उन्होंने मीडिया की टीआरपी बढ़ाने का जरिया बताया और कहा कि पार्टी अपनी तय कमेटी के जरिए ही योग्य प्रत्याशियों का चयन करेगी।
टीएमसी का अंतर्कलह और फर्जीवाड़ा संस्कृति का खात्मा
बॉबी हकीम और सौगत रॉय के बीच जारी खींचतान और बॉबी की बेटी प्रियदर्शिनी की भावुक पोस्ट पर तंज कसते हुए दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 साल आपस में ही लड़ती रही और जनता के हाथ कुछ नहीं लगा। अब टीएमसी का दौर खत्म हो चुका है, इसलिए पुराने विवादों को कुरेदने का कोई मतलब नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टरों की प्रॉक्सी ड्यूटी पकड़े जाने पर उन्होंने कहा कि फर्जी डॉक्टर, फर्जी इंजीनियर और फर्जी वोटर तैयार करना पूर्ववर्ती सरकार का कल्चर था, जिसे अब साफ किया जा रहा है। वहीं पूर्व पार्षद के करीबियों की बर्बरता और पापिआ अधिकारी के पूर्व सहायक की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है और जो भी गलत करेगा, प्रशासन उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई करेगा।