29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता, हाबरा, बर्धमान समेत 9 जगहों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई राशन घोटाला मामले में की जा रही है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
2020 के केस से जुड़ा है मामला
ED सूत्रों के अनुसार, यह जांच 2020 के अक्टूबर महीने में बशीरहाट थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी हुई है। उस समय घोजाडांगा कस्टम्स के डिप्टी कमिश्नर की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि FCI के सरकारी गेहूं की कालाबाजारी कर उसे बांग्लादेश में तस्करी के जरिए भेजा जा रहा था।
पहले भी हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में करीब 6 साल पहले 3 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में इस पूरे मामले की जांच ED ने अपने हाथ में ली। अब इसी केस में एक साथ 9 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
हाबरा में चावल कारोबारियों पर फोकस
उत्तर 24 परगना के हाबरा में कई चावल कारोबारियों के घरों पर ED की टीम पहुंची। केंद्रीय बलों के साथ जयगाछी नेताजी रोड स्थित कारोबारी समीर चंद के घर पर छापेमारी की गई। ED के मुताबिक, समीर चंद चालपट्टी इलाके में चावल के बड़े कारोबारी हैं और राशन घोटाला जांच में उनका नाम सामने आया है।
सागर साहा और राजीव साहा भी जांच के दायरे में
हाबरा के श्रीनगर मेन रोड स्थित कारोबारी सागर साहा के घर भी ED की टीम पहुंची। वहीं एक अन्य कारोबारी राजीव साहा के प्रतिष्ठान पर भी जांच जारी है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि चावल कहां से खरीदा गया, किस नाम से मंडियों में भेजा गया और सरकारी राशन का अनाज किस तरह कालाबाजारी के जरिए बाहर पहुंचा।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले हुई ED की इस बड़ी कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजर अब इस जांच और उसके राजनीतिक असर पर टिकी हुई है।