Enforcement Directorate (ED) ने Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ED का कहना है कि कोलकाता में I-PAC दफ्तर पर की जा रही जांच के दौरान राज्य सरकार ने जानबूझकर बाधा डाली। ED की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
‘दस्तावेज उठाए, CCTV डेटा छीना’—ED का आरोप
ED ने आरोप लगाया कि:
जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज उठा लिए गए
कंप्यूटर बैकअप प्रक्रिया रोक दी गई
CCTV फुटेज का स्टोरेज जब्त कर लिया गया
एजेंसी का कहना है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न है, जिसमें जांच एजेंसियों को काम करने से रोका जाता है।
CBI जांच की मांग, FIR पर भी सवाल
ED ने कोर्ट से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी जाए। साथ ही ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को भी “फर्जी” बताते हुए कहा गया कि:
पुलिस को पहले से जानकारी थी कि ये ED अधिकारी हैं
फिर भी “अज्ञात लोगों” के खिलाफ FIR दर्ज की गई
‘कानून का शासन खतरे में’—कोर्ट में दलील
ED ने दलील दी कि:
जब एक मुख्यमंत्री खुद जांच में हस्तक्षेप करे, तो यह “Rule of Law” का उल्लंघन है
जांच अधिकारियों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं
इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है।
अगली सुनवाई 13 मई को
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट याचिका की सुनवाई योग्यता पर विचार कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय की गई है, जहां यह तय होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
I-PAC निदेशक पर भी कार्रवाई
इस बीच, I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुई है।