कोलकाता: उत्तर कोलकाता के काशीपुर-बेलगाछिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ज्योतिनगर कलोरी में पिछले एक महीने से अधिक समय से पेयजल संकट बना हुआ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके के पांच सार्वजनिक नलों से पानी की आपूर्ति बंद है, जिसके कारण करीब 500 परिवार प्रभावित हैं। जलापूर्ति बहाल करने की मांग को लेकर रविवार को माकपा से जुड़े बस्ती संगठन की ओर से इलाके में विरोध मार्च और सभा आयोजित की गई। माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पानी की आपूर्ति किसी तकनीकी वजह से नहीं, बल्कि बस्ती को खाली कराने और राजनीतिक प्रतिशोध के उद्देश्य से रोकी गई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, KMC की ओर से कथित तौर पर पाइपलाइन या फेरुल में तकनीकी समस्या की संभावना जताई गई है।
पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरे माकपा कार्यकर्ता
रविवार को आयोजित प्रदर्शन में माकपा नेता डॉ. फुआद हलीम, अब्दुल रऊफ और बस्ती संगठन के नेता शुभरंजन दे समेत कई वामपंथी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से बंद जलापूर्ति को तत्काल बहाल करने की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए फुआद हलीम ने कहा कि स्वच्छ पेयजल नागरिकों की बुनियादी जरूरत है और किसी भी विवाद के कारण आम लोगों को पानी से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की। बस्ती संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि यदि जल्द पानी नहीं पहुंचाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का कहना है कि फिलहाल जरूरतमंद परिवारों तक टैंकर के जरिए पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
29 जुलाई के बाद से पांच सार्वजनिक नल बंद होने का दावा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, करीब 29 जुलाई से ज्योतिनगर कलोरी के पांच सार्वजनिक नलों में पानी आना बंद हो गया। लोगों का कहना है कि शुरुआत में बिजली की आपूर्ति भी प्रभावित हुई थी, लेकिन विरोध के बाद बिजली बहाल कर दी गई। इसके बावजूद पानी की समस्या बनी हुई है। पानी की नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण परिवारों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि रोजमर्रा के कामों के लिए कई परिवार गंगा के पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। निवासियों का कहना है कि इससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है। गंदे पानी के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायत भी सामने आ रही है। पानी की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई और रोजाना स्कूल आने-जाने पर पड़ने का भी दावा किया गया है।
बस्ती की जमीन को लेकर विवाद, बेदखली का भी आरोप
स्थानीय बस्ती संगठन का दावा है कि ज्योतिनगर कलोरी का सरकारी दस्तावेजों में पुराना रिकॉर्ड मौजूद है और यहां रहने वाले लोग लंबे समय से मतदान करते आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि जमीन को लेकर चल रहे विवाद की आड़ में बस्ती के लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय विधायक रीतेश तिवारी के अनुसार, बस्ती जिस जमीन पर स्थित है, वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के अधिकार क्षेत्र की जमीन है। उनके मुताबिक, पोर्ट प्रशासन की ओर से निवासियों को अवैध कब्जाधारी बताया गया है। विधायक के अनुसार, बस्ती के कुछ निवासी पहले निचली अदालत गए थे, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट में विचाराधीन बताया जा रहा है।
KMC ने तकनीकी समस्या की संभावना जताई
पानी की आपूर्ति बंद होने को लेकर राजनीतिक आरोपों के बीच KMC की ओर से अलग तस्वीर सामने रखी गई है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य पाइपलाइन या फेरुल में तकनीकी समस्या के कारण पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है। निगम की ओर से कथित तौर पर इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं जानबूझकर पानी की लाइन तो नहीं काटी गई। ऐसे में पानी की वास्तविक समस्या तकनीकी खराबी के कारण है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीणों की मांग—जल्द खत्म हो पानी का संकट
ज्योतिनगर कलोरी के निवासियों की सबसे बड़ी मांग फिलहाल पेयजल आपूर्ति की बहाली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवाद और अदालत में मामला चलने का असर रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। लोगों ने KMC और प्रशासन से इलाके में पानी की लाइन की तत्काल जांच कराने, सार्वजनिक नलों से नियमित जलापूर्ति शुरू करने और जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक पर्याप्त टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है।