मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित सालबनी जमीन कब्जा और धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसी CID ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक सुजय हाजरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी की ओर से मेदिनीपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में 15 पन्नों का आरोप पत्र पेश किया गया है, जिसमें पूर्व विधायक समेत कुल पांच आरोपियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। मामला सरकारी और निजी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और जबरन वसूली के आरोपों से जुड़ा है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले को विशेष अदालत में भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अदालत ने आरोपियों को 17 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया है।
पांच आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल
CID की चार्जशीट में सुजय हाजरा के अलावा उनके करीबी बताए जाने वाले अनिकेत परिया समेत चार अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नामजद पांच आरोपियों में से दो फिलहाल फरार हैं। उनके खिलाफ अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने की बात कही गई है। जांच एजेंसी की कार्रवाई यहीं खत्म होती नजर नहीं आ रही है। मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है। इनमें तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के पूर्व सहयोगी बताए जाने वाले सुमित राय का नाम भी सामने आया है। उनकी भूमिका स्पष्ट होने के बाद CID की ओर से पूरक चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है सालबनी जमीन घोटाला?
पश्चिम मेदिनीपुर के सालबनी इलाके में सरकारी और निजी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का यह मामला सामने आया था। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और कथित बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए जमीन पर कब्जा करने और लोगों से जबरन रकम वसूलने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित जमीन नेटवर्क किस तरह काम करता था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। चार्जशीट में दर्ज आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
नौकरी के नाम पर ठगी के आरोप से भी जुड़ा मामला
सुजय हाजरा का नाम केवल सालबनी जमीन मामले में ही नहीं, बल्कि डेबरा इलाके में कथित नौकरी धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों में भी सामने आया है। आरोप है कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बेरोजगार युवाओं से पैसे लिए गए थे। इन दोनों मामलों में जांच एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चार्जशीट में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना या उसके खिलाफ आरोप लगना अपराध साबित होने के बराबर नहीं है। अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
जून में हुई थी सुजय हाजरा की गिरफ्तारी
मामले में कई महीनों तक फरार रहने के बाद सुजय हाजरा को जून 2026 में खड़गपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई थी। गिरफ्तारी के बाद CID ने जांच आगे बढ़ाते हुए उनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कथित तौर पर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए, जिनकी जांच मामले में की जा रही है।
17 सितंबर को अदालत में अहम सुनवाई
CID की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख 17 सितंबर है। अदालत ने आरोपियों को उस दिन पेश होने का निर्देश दिया है। इसके बाद अदालत चार्जशीट, जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। आरोप तय करने की प्रक्रिया कब और किस रूप में शुरू होगी, यह अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
जंगलमहल की राजनीति में भी बढ़ सकती है हलचल
सालबनी और पश्चिम मेदिनीपुर का इलाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पूर्व TMC विधायक के खिलाफ CID की चार्जशीट का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल इस मामले को भ्रष्टाचार और कथित जमीन कब्जे के मुद्दे के तौर पर उठा सकते हैं। वहीं, आरोपी पक्ष के पास अदालत में आरोपों का जवाब देने और अपने बचाव में साक्ष्य पेश करने का कानूनी अधिकार है। फिलहाल मामले की अगली दिशा 17 सितंबर की अदालत की सुनवाई और आगे होने वाली जांच से तय होगी।