उत्तर प्रदेश में मानसून की लगातार सक्रियता अब बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वाराणसी और प्रयागराज समेत प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हुए हैं, जबकि अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। करीब 5 हजार लोग फिलहाल राहत शिविरों में रह रहे हैं। शनिवार सुबह लखनऊ, नोएडा, बाराबंकी, हरदोई और सीतापुर समेत करीब 10 शहरों में हल्की बारिश हुई। कई अन्य इलाकों में बादल छंटने के बाद धूप भी दिखाई दी। मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 71 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
यूपी में मानसून ने पूरा किया बारिश का कोटा, आंकड़ा सामान्य के बेहद करीब
इस मानसूनी सीजन में उत्तर प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच चुका है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 612 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 619.7 मिमी है। यानी पूरे मानसून सीजन में अब तक बारिश सामान्य से केवल 1 प्रतिशत कम है। लगातार हो रही बारिश के चलते प्रदेश के कई नदी-तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
रिहंद बांध में बढ़ा पानी, एक गेट से छोड़ा जा रहा करीब 29 हजार क्यूसेक
सोनभद्र के रेणुकूट स्थित पिपरी रिहंद बांध का जलस्तर शनिवार सुबह 871.8 फीट तक पहुंच गया। कैचमेंट एरिया में बारिश कम होने के कारण बांध में पानी की आवक फिलहाल घट गई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश शर्मा के मुताबिक केंद्रीय जल आयोग से मिले इनपुट के आधार पर फिलहाल एक फाटक से पानी की निकासी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बांध की स्थिति नियंत्रण में है। जल विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता शशिकांत राय के अनुसार बांध की सभी छह टरबाइन चालू हैं और बिजली उत्पादन जारी है। एक फाटक और टरबाइनों के जरिए करीब 29 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
आगरा में जलभराव के बीच प्रसूता को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी
आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र में बारिश और जलभराव ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। रामदास की ठार चाचीपुरा खंडेर गांव में शुक्रवार रात बबलू की पत्नी रीना को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन पानी से भरे रास्ते के कारण वाहन आगे नहीं पहुंच सका। इसके बाद परिजनों ने रीना को चारपाई पर लिटाया और करीब आधा किलोमीटर तक पानी भरे रास्ते से कंधों पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले 21 अगस्त को भी स्याहीराम के शव को चारपाई के जरिए गांव तक लाना पड़ा था।
घाघरा खतरे के निशान से ऊपर, गोंडा के गांवों में बढ़ी चिंता
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शनिवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.340 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 4 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। तरबगंज क्षेत्र के गढ़ी और जबर नगर गांव के किनारे पानी पहुंचने से करीब 1,000 लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में 60 से अधिक नावें तैनात की हैं। ऐली परसौली समेत कई गांवों में पानी घुसने की आशंका है। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए ग्रामीणों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। ब्योन्दा माझा में भी पानी पहुंचने लगा है, जबकि दत्तानगर और बाणी माझा में नदी कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
बाराबंकी में सरयू का बढ़ता जलस्तर, कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
बाराबंकी में लगातार बारिश और नेपाल के बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण सरयू नदी उफान पर है। शनिवार सुबह 8 बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 27 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। इसके बाद रामसनेहीघाट तहसील के तराई इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा। गुनौली मांझा, कोयलावर, ढेमा, टिकरी और जलालपुर तराई समेत कई गांवों में हालात गंभीर बने हुए हैं। बाराबंकी में बाढ़ के कारण 25 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित बताए गए हैं।
हमीरपुर में खेतों में भरा पानी, तिल-मूंग-उड़द की फसल पर संकट
हमीरपुर में पिछले करीब 10 दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कई खेतों में पानी भरने से तिल, मूंग और उड़द की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों की चिंता है कि अगर खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है। सिसोलर क्षेत्र में अर्जुन सहायक नहर में कटान के कारण करीब 100 बीघा फसल पानी में डूब गई। सिंचाई विभाग के एक्सईएन के मुताबिक नहर की मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है।
अगस्त में टूटा बारिश का रिकॉर्ड, 2018 के बाद सबसे ज्यादा बारिश
उत्तर प्रदेश में अगस्त 2026 बारिश के लिहाज से बेहद सक्रिय रहा। पूरे प्रदेश में अगस्त के दौरान 291.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि दीर्घकालिक औसत 235.5 मिमी है। इस हिसाब से अगस्त में सामान्य से करीब 24 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। यह 21वीं सदी में 2018 के बाद अगस्त महीने में दर्ज हुई सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है। वर्ष 2018 में अगस्त के दौरान प्रदेश में 293.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई थी।
प्रयागराज और बांदा में अगस्त की बारिश ने बनाया नया रिकॉर्ड
बारिश के मामले में प्रयागराज और बांदा ने भी पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। अगस्त में प्रयागराज में 631.6 मिमी और बांदा में 646 मिमी बारिश दर्ज की गई। उपलब्ध वर्ष 1901 से अगस्त महीने के मौसम रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों जिलों के लिए यह अगस्त में दर्ज हुई सबसे अधिक बारिश है।
अगले चरण में 71 जिलों पर मौसम विभाग की नजर
प्रदेश में बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने शनिवार को 71 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी यूपी में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है। पूर्वी हिस्से में पहले से नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में लगातार बारिश होने पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।