दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार की तेज बारिश के बाद शनिवार सुबह भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। कई इलाकों में बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं और सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ। भारतीय मौसम विभाग के 5 सितंबर के पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है तथा 6 सितंबर को भी वर्षा का दौर जारी रह सकता है। शुक्रवार की बारिश के दौरान राजधानी के कई हिस्सों में व्यापक जलभराव हुआ था और यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया था। हवाई अड्डे के आसपास भी पानी जमा होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई उड़ानों के मार्ग में बदलाव करना पड़ा।
मौसम विभाग की चेतावनी, अगले 24 घंटे अहम
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधि सक्रिय रहने के संकेत हैं। 5 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है। दिल्ली के लिए भी 5 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी है। विभाग के अनुसार मौसम की मौजूदा स्थिति पर उत्तर भारत में सक्रिय मौसमी प्रणालियों का प्रभाव है, जिसके कारण बादलों का जमाव और वर्षा की गतिविधियां बनी हुई हैं। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और तेज बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर अचानक पानी भरने जैसी परिस्थितियों से इनकार नहीं किया जा सकता।
शुक्रवार की बारिश ने राजधानी की व्यवस्था की खोली पोल
शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने दिल्ली की जलनिकासी व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में पानी भरने के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कुछ हिस्सों में भी जलभराव की स्थिति बनी और आने वाली कई उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर भेजना पड़ा। शुक्रवार को दिल्ली के पालम क्षेत्र में 75.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि नारायणा, जनकपुरी, लोधी रोड और सफदरजंग जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय बारिश हुई। बारिश के साथ तेज हवाओं ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाया, जिससे सड़क यातायात के साथ हवाई यातायात पर भी असर पड़ा।
बिहार में गंगा समेत कई नदियों का बढ़ा जलस्तर
बिहार में बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण बाढ़ का खतरा गंभीर होता जा रहा है। शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर गांधी घाट पर अपने अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि बूढ़ी गंडक, कोसी और बागमती समेत कई प्रमुख नदियों में भी पानी बढ़ा हुआ है। झारखंड और नेपाल के हिस्सों में हुई बारिश का प्रभाव भी बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है। कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां बन गई हैं और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ानी पड़ी है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि के बीच ग्रामीण और नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में भी नदियों के उफान से बढ़ी मुश्किल
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 5 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि पूर्वी हिस्सों में भी आने वाले दिनों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि का असर नदी किनारे बसे जिलों में दिखाई दे रहा है और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी हुई है। चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में वर्षा तथा नदियों के बढ़ते पानी के कारण स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 5 और 6 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई है, इसलिए नदी किनारे और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले 1-2 दिन विशेष सावधानी के हैं।
पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश का असर केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक जलधारा बढ़ने और सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 5 सितंबर सहित अगले कई दिनों तक भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश में भी 5 सितंबर को व्यापक वर्षा और आंधी-तूफान की स्थिति बनने का अनुमान है। ऐसे मौसम में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है, क्योंकि लगातार बारिश से कमजोर ढलानों के खिसकने और सड़क पर मलबा आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
कई राज्यों में सक्रिय रहेगा मानसून, बढ़ेगी मौसम की मार
मौजूदा मौसमी प्रणाली का प्रभाव केवल दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और देश के पूर्वोत्तर हिस्सों में भी अलग-अलग तीव्रता की बारिश का पूर्वानुमान है। मध्य भारत में कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार 5 सितंबर से मध्य भारत के कई हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां सक्रिय रह सकती हैं और कुछ क्षेत्रों में अगले कई दिनों तक इसका असर देखने को मिलेगा। इससे नदियों, नालों और जलाशयों के जलस्तर पर भी दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से जमीन में नमी अधिक है।
बारिश राहत भी लाई, लेकिन जोखिम कम नहीं हुआ
लगातार बारिश ने जहां दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में उमस और गर्मी से राहत दी है, वहीं भारी वर्षा ने शहरी बुनियादी ढांचे और ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां भी बढ़ा दी हैं। राजधानी में तापमान में गिरावट के कारण मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हुआ है, लेकिन जलभराव और यातायात की समस्या ने इस राहत को परेशानी में बदल दिया है। बिहार और उत्तर प्रदेश में स्थिति और अधिक संवेदनशील है, क्योंकि वहां बारिश के साथ नदियों का बढ़ता जलस्तर सीधे बाढ़ के खतरे से जुड़ा है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक आवागमन से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। अगले 24-48 घंटे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि बारिश की तीव्रता घटती है या मौजूदा जलभराव और बाढ़ का दबाव और बढ़ता है।