कोलकाता. सुवेंदु अधिकारी ने दक्षिण 24-परगना के बारुईपुर में गणतंत्र बचाओ सभा को संबोधित करते हुए इंडिया गठबंधन की दिल्ली स्थित रामलीला मैदान वाली रैली पर निशाना साधा। उन्होंने ममता बनर्जी के इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कटाक्ष किया। विपक्षी एकजुटता के प्रदर्शन को लेकर उनकी प्रतिक्रिया तीखी रही। स्थानीय सभा में उन्होंने राज्य की राजनीति को केंद्र में रखते हुए हमला बोला। रैली को बंगाल की समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला बताया गया। राजनीतिक संदेश साफ था कि राज्य में चुनौतियां अलग हैं।
ममता के राजनीतिक करियर पर हमला
सुवेंदु ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर खत्म हो चुका है। अब उनके लिए राज्य में कुछ नहीं बचा है। चाहे जितने चुनाव लड़ लें हारती ही रहेंगी। इस बयान से उन्होंने विपक्षी नेता की स्थिति को कमजोर बताने की कोशिश की। स्थानीय मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया गया। राजनीतिक भविष्य को लेकर सीधा हमला किया गया। सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं के सामने यह संदेश दोहराया गया। करियर समाप्ति का दावा जोरदार तरीके से पेश किया गया।
दिल्ली भागने का आरोप
सुवेंदु ने आरोप लगाया कि ममता अब दिल्ली भाग रही हैं। एक तरफ सीपीएम के महासचिव हैं और दूसरी तरफ वह जो कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थीं। अब उसी कांग्रेस का समर्थन मांग रही हैं। पुरानी राजनीतिक शत्रुता और वर्तमान गठबंधन की विडंबना को रेखांकित किया गया। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने को राज्य से भागने से जोड़ा गया। गठबंधन की मजबूरी को उजागर करने की कोशिश की गई। स्थानीय मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया गया।
चुनाव लड़ने की चुनौती
सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को ललकारते हुए कहा कि उन्होंने दो बार हराया है। एक बार 2021 में नंदीग्राम में और दूसरी बार भवानीपुर में। आप अपने ही इलाके भवानीपुर में हार गईं। अपने पोलिंग बूथ और वार्ड में हारीं। अगर हिम्मत है तो फिर से चुनाव लड़िए। मैं आपको फिर हरा दूंगा। अगर दम है तो आइए और मुकाबला कीजिए। सीधी चुनौती देकर राजनीतिक संग्राम का आह्वान किया गया। व्यक्तिगत मुकाबले की बात को आगे बढ़ाया गया।
नंदीग्राम और भवानीपुर हार का जिक्र
सुवेंदु ने 2021 के नंदीग्राम और भवानीपुर उपचुनाव या संबंधित चुनावों में ममता की हार का जिक्र किया। मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में हुए उपचुनाव में ममता के उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का भी उल्लेख किया। लगातार चुनावी पराजयों को आधार बनाकर हमला बोला गया। विपक्षी नेता की कमजोरियों को उजागर करने की रणनीति अपनाई गई। स्थानीय स्तर की हार को बड़े राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया। चुनावी आंकड़ों का सहारा लेकर दावे को मजबूत किया गया।
तृणमूल और सीपीएम नजदीकी पर कटाक्ष
सुवेंदु ने ममता बनर्जी की सीपीएम के साथ बढ़ी नजदीकी पर तंज कसते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस का गठन ही सीपीएम का मुकाबला करने के लिए हुआ था और उसे हराकर ही तृणमूल सत्ता में आई थी। पुराने वैचारिक विरोध और वर्तमान सहयोग की विसंगति को उजागर किया गया। गठबंधन की राजनीति पर सवाल खड़े किए गए। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला देकर वर्तमान रुख की आलोचना की गई। राजनीतिक सिद्धांतों की बात को आगे बढ़ाया गया।