नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर बाहर आए सांसद काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और सुदीप बनर्जी समेत 20 सांसदों ने मंगलवार को नई दिल्ली के हैली रोड स्थित बंग भवन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ मध्याह्नभोज पर अहम बैठक की। इससे पहले बीती 8 जून को भी इन नेताओं की नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी, जिसके बाद 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में इनके शामिल होने की नींव रखी गई थी।सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को हुई बैठक में इन बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा की गई। फिलहाल ये सांसद एनडीए (NDA) के सहयोगी हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए हैं। बंगाल में जमीनी स्तर पर तालमेल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल 'सिटिजन्स पार्टी' में ही रहने के निर्देश
बैठक में बागी सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे फिलहाल अपनी नई 'सिटिजन्स पार्टी' में ही बने रहें। दरअसल, ऋतव्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के समक्ष याचिका दायर कर तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोका है। चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की हरी झंडी मिलते ही इन सभी सांसदों को सीधे भाजपा में शामिल कराया जा सकता है।तृणमूल कांग्रेस में हुए इस विभाजन को लेकर मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में लंबित है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि एक बार चुनाव आयोग से प्रतीक चिह्न मिल जाने के बाद इन सांसदों के भाजपा में विलय की प्रक्रिया कानूनी रूप से सुगम हो जाएगी।
सुरक्षा का आश्वासन और नबन्ना में अगली बैठक
बैठक के दौरान इन सांसदों को राज्य राजनीति में काम करने के अवसर देने और सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सांसदों को पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।इसके साथ ही, राज्य राजनीति में निचले स्तर पर आपसी तालमेल बेहतर करने के लिए इसी माह की 18 या 19 तारीख को नबन्ना (राज्य सचिवालय) में एक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में इन बागी सांसदों के साथ स्थानीय भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि दोनों पक्ष मिलकर सुचारू रूप से कार्य कर सकें।