कोलकाता- पश्चिम बंगाल में आखिरकार आयुष्मान भारत योजना का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के बीच नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस फैसले के साथ पश्चिम बंगाल भी देश में आयुष्मान भारत योजना लागू करने वाला 36वां राज्य बन जाएगा। माना जा रहा है कि इस कदम से राज्य के करोड़ों लोगों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
6 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा फायदा
सरकार की योजना के अनुसार राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना से जुड़े करीब 6 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा नए पात्र परिवारों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
2018 से अटका था मामला
केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने अपनी ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना का हवाला देते हुए इसे लागू नहीं किया था। पिछले आठ वर्षों से पश्चिम बंगाल इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना से बाहर था। अब नई सरकार के फैसले के बाद यह स्थिति बदलने जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा सहारा
राज्य में लंबे समय से स्वास्थ्य साथी योजना को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई लाभार्थियों का आरोप था कि निजी अस्पताल कार्ड स्वीकार करने में आनाकानी करते हैं, जबकि अस्पतालों का कहना था कि भुगतान में देरी के कारण उन्हें परेशानी होती है। आयुष्मान भारत लागू होने के बाद इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ेगा समन्वय
नई दिल्ली में होने वाले इस समझौते को केंद्र और राज्य के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी और गरीब परिवारों को इलाज के लिए आर्थिक मदद मिल सकेगी।