कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बीच अब राज्य बार काउंसिल के चुनाव में भी बीजेपी समर्थित वकीलों की जीत चर्चा का विषय बन गई है। सोमवार को हुए चुनाव में बीजेपी समर्थित तीन उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इनमें समीर पाल और अजय चौबे प्रेसिडेंसी बार से निर्वाचित हुए हैं। वहीं, कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले वकील अरुण सरकार ने भी बीजेपी के समर्थन से चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
बार काउंसिल चुनाव में BJP समर्थित तीन उम्मीदवारों की जीत
राज्य बार काउंसिल के चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों की जीत को कानून जगत में बदलते राजनीतिक समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। समीर पाल और अजय चौबे के साथ अरुण सरकार की जीत ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इस चुनाव परिणाम का राज्य बार काउंसिल के कामकाज पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
विजयी उम्मीदवारों के साथ CM सुवेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
चुनाव में जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों के साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े वकीलों ने राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बार काउंसिल वकीलों का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मंच है। ऐसे संस्थान में आपसी सहयोग का माहौल बनना राज्य की न्याय व्यवस्था और प्रशासन के लिए सकारात्मक है।
विपक्ष पर CM का हमला, अस्थिरता की साजिश का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी खेमे का एक वर्ग देशविरोधी ताकतों के संपर्क में रहकर निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की साजिश कर रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
UCC पर दो से तीन महीने में आ सकती है आयोग की रिपोर्ट
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने बताया कि UCC पर गठित आयोग की रिपोर्ट अगले दो से तीन महीने में मिलने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद विधानसभा में विधेयक लाकर कानून लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने धर्मांतरण रोकने के लिए अलग कानून लाने की बात भी कही।
कानून जगत में बदलते समीकरण पर सबकी नजर
राज्य बार काउंसिल चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों की जीत के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव परिणाम का बार काउंसिल की कार्यप्रणाली और राज्य की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है