कोलकाता: पश्चिम बंगाल STF ने किडनी तस्करी के कथित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बागुईआटी के आठघड़ा फूलतला इलाके से बांग्लादेशी नागरिक रसेल अहमद को गिरफ्तार किया है। उसे शनिवार रात गिरफ्तार करने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए विधाननगर दक्षिण थाना पुलिस को सौंप दिया गया।
2024 में भी हो चुकी है गिरफ्तारी
रसेल अहमद इससे पहले भी जांच एजेंसियों के निशाने पर आ चुका है। वर्ष 2024 में दिल्ली पुलिस ने उसे कथित किडनी तस्करी गिरोह से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सामने आया था कि बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद उसने भारत में कथित तौर पर अवैध तरीके से आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा लिए थे।
बंगाल में किराये के मकान में रह रहा था
जांच एजेंसियों के अनुसार, रसेल पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर अवैध तरीके से किराये का मकान लेकर रह रहा था। आरोप है कि इसी दौरान उसने किडनी तस्करी के नेटवर्क को विस्तार दिया और दूसरे बांग्लादेशी नागरिकों को भी इस कथित गिरोह से जोड़ा।
पीड़ित के पिता की शिकायत से खुली कड़ी
मामले की जांच उस समय आगे बढ़ी जब 18 अगस्त को एक पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर विधाननगर पुलिस ने कथित तौर पर गिरोह के मिडिलमैन प्रभास को गिरफ्तार किया। प्रभास से पूछताछ के दौरान ही रसेल अहमद का नाम जांचकर्ताओं के सामने आया।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि कथित किडनी तस्करी गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था। जरूरतमंद लोगों को कथित तौर पर पैसों का लालच देकर इस नेटवर्क में फंसाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।
रेट चार्ट और अस्पतालों के दस्तावेज बरामद
पुलिस के मुताबिक, रसेल के पास से एक कथित रेट चार्ट बरामद हुआ है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के निजी अस्पतालों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन कागजातों में कथित तौर पर अलग-अलग अस्पतालों में किडनी की जरूरत और संबंधित जानकारियों का उल्लेख है। बरामद दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
पूछताछ में खुलेगा नेटवर्क का राज
रसेल अहमद को फिलहाल विधाननगर दक्षिण थाना पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। जांचकर्ताओं का फोकस कथित गिरोह के नेटवर्क, इसके सदस्यों, अस्पतालों से संभावित संपर्क और आर्थिक लेन-देन से जुड़ी कड़ियों का पता लगाने पर है।