नई दिल्ली - धनतेरस और दिवाली के साथ सोने-चांदी की खरीदारी का सबसे बड़ा दौर शुरू होने जा रहा है। परंपरागत रूप से इन त्योहारों पर भारतीय परिवार बड़ी संख्या में सोना, चांदी और आभूषण खरीदते हैं। अगले हफ्ते शुक्रवार को धनतेरस और रविवार को दिवाली होने के चलते सर्राफा बाजार में रौनक बढ़ गई है। हालांकि, इस बार बाजार का माहौल पिछले वर्षों से कुछ अलग नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण खरीदारों के साथ ज्वैलर्स भी सतर्कता बरत रहे हैं।
कीमतों में उतार-चढ़ाव से बाजार पर दबाव
सोने और चांदी के दाम में लगातार बदलाव ने बाजार की रणनीति को प्रभावित किया है। कीमतों में अस्थिरता के कारण ग्राहक खरीदारी का फैसला सोच-समझकर ले रहे हैं। वहीं, ज्वैलर्स भी बाजार की दिशा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्हें इस बात का ध्यान रखना पड़ रहा है कि कीमतों में बदलाव का असर बिक्री और कारोबार पर न पड़े।
एडवांस में ज्यादा स्टॉक जमा करने से बच रहे ज्वैलर्स
इस बार बड़े ज्वैलरी ब्रांड त्योहारों से पहले भारी मात्रा में इन्वेंट्री जमा करने से बच रहे हैं। वे बाजार में रिटेल बिक्री की रफ्तार और ग्राहकों की वास्तविक मांग को देखकर ही स्टॉक रखने की रणनीति अपना रहे हैं।
दरअसल, कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच पहले से बड़ी मात्रा में सोना-चांदी खरीदकर रखना कारोबारियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में ज्वैलर्स जरूरत और बिक्री के अनुमान के मुताबिक ही माल मंगाने पर जोर दे रहे हैं।
ग्राहकों की खरीदारी पर भी रहेगी नजर
धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने-चांदी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। लोग इन अवसरों पर सिक्के, बार, आभूषण और चांदी के बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं। लेकिन इस बार कीमतों में अस्थिरता के कारण ग्राहक खरीदारी का समय और बजट तय करने में सावधानी बरत सकते हैं।
त्योहारों के कारोबार के लिए अहम रहेगा यह सप्ताह
सर्राफा कारोबारियों के लिए धनतेरस और दिवाली का समय साल के सबसे महत्वपूर्ण बिक्री सीजन में शामिल होता है। इस बार ज्वैलर्स की नजर रिटेल डिमांड पर टिकी है। बाजार में ग्राहकों की प्रतिक्रिया और कीमतों की चाल के आधार पर आगे की कारोबारी रणनीति तय की जाएगी। इस तरह त्योहारों की रौनक के बीच सोना-चांदी बाजार में इस साल खरीदारी के साथ सतर्कता का माहौल भी बना हुआ है।