नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को INDIA ब्लॉक की बड़ी राजनीतिक रैली को लेकर माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला मिंटो रोड से रामलीला मैदान की ओर बढ़ रहा है। 'चलो दिल्ली' के नारे और पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी के बीच राजधानी की सड़कों पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस रैली के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध और तेज करने का फैसला किया है।
मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकला विपक्ष का मार्च
INDIA ब्लॉक की ओर से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मिंटो रोड-Connaught Place जंक्शन से हुई। दोपहर करीब 12 बजे प्रस्तावित मार्च में विपक्षी दलों के नेता और समर्थक शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से नेताओं के ओपन बस के जरिए मार्च के शुरुआती स्थान तक पहुंचने की भी योजना थी। इसके बाद सभी रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए, जहां मुख्य रैली आयोजित की जा रही है।
21 विपक्षी दलों की एकजुटता दिखाने की तैयारी
इस प्रदर्शन में INDIA ब्लॉक से जुड़े करीब 21 विपक्षी दलों के नेताओं की भागीदारी प्रस्तावित है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव समेत कई प्रमुख विपक्षी चेहरों के इस राजनीतिक जमावड़े से जुड़ने की उम्मीद है। अलग-अलग राज्यों से पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी दिल्ली पहुंचे हैं। विपक्ष इस आयोजन को अपनी राजनीतिक एकजुटता और ताकत के प्रदर्शन के तौर पर पेश कर रहा है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 'वोट चोरी' का मुद्दा केंद्र में
रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। इसी को लेकर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। ऐसे में यह रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का भी संकेत दे रही है।
एक दिन पहले खड़गे के आवास पर हुआ था प्रतीकात्मक 'जनता का महाभियोग'
इस रैली से ठीक एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जनता का महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों वाला प्रस्ताव पेश किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि राहुल गांधी ने समापन संबोधन दिया।
हालांकि, यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था, कोई औपचारिक संवैधानिक महाभियोग या पद से हटाने की प्रक्रिया नहीं थी। विपक्ष अब इसी मुद्दे को रामलीला मैदान की रैली के जरिए और व्यापक स्तर पर उठाना चाहता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 4 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
रैली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। रामलीला मैदान और मार्च के रास्ते पर 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे आयोजन स्थल को 14 जोन में बांटा गया है।
इसके अलावा निगरानी के लिए 200 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। ड्रोन और अन्य निगरानी उपकरणों की भी मदद ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव, कई रास्तों पर डायवर्जन
रैली के मद्देनजर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए हैं। मिंटो रोड, बहादुर शाह जफर मार्ग, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, अरुणा आसफ अली रोड, बाराखंबा रोड और देशबंधु गुप्ता रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
ITO, दिल्ली गेट, राजघाट, अजमेरी गेट, तुर्कमान गेट और झंडेवालान जैसे प्रमुख चौराहों पर भी यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे प्रभावित रास्तों से बचें और घर से निकलने से पहले अपनी यात्रा की योजना बना लें।
10 लाख लोगों के जुटने का दावा, पुलिस का अनुमान करीब 50 हजार
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने रैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है। वहीं, दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों की भीड़ जुटने का है। आयोजन स्थल पर अलग-अलग प्रवेश द्वार, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और महिलाओं के लिए अलग शौचालयों की व्यवस्था की गई है।
कुल मिलाकर, रामलीला मैदान में होने वाली यह रैली INDIA ब्लॉक के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का बड़ा मंच बन गई है। अब सबकी नजरें रामलीला मैदान से होने वाले नेताओं के संबोधनों और इस प्रदर्शन के राजनीतिक संदेश पर टिकी हैं।