नई दिल्ली. भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों में शामिल वी. अनंत नागेश्वरन ने एक महत्वाकांक्षी अनुमान पेश किया है। उनका मानना है कि यदि भारत लगातार तेज आर्थिक वृद्धि बनाए रखने में सफल रहता है और विज्ञान तथा तकनीक के क्षेत्र में मजबूत प्रगति करता है, तो स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश 30 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विस्तार का संकेत नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की निर्णायक भूमिका की भी ओर इशारा करता है।
आईआईटी मद्रास में रखा आर्थिक विकास का विजन
आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारत की विकास क्षमता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को डॉलर आधारित गणना में लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 3.91 ट्रिलियन डॉलर की मानी जा रही है और विभिन्न आर्थिक अनुमानों के अनुसार आने वाले छह वर्षों में यह बढ़कर लगभग 7.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
केवल वृद्धि नहीं, ढांचागत सुधार भी जरूरी
वी. अनंत नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक विस्तार के आंकड़े पर्याप्त नहीं होंगे। भारत को लंबे समय तक ऊंची विकास दर बनाए रखने के लिए अपनी संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ऐसे समय में भारत को अपनी नीतिगत क्षमता, औद्योगिक ढांचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाना होगा। उनके अनुसार, यदि देश समय रहते इन चुनौतियों का समाधान कर लेता है तो आर्थिक विकास की गति और अधिक मजबूत हो सकती है।
सस्ते इनोवेशन से आगे बढ़ने का समय
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने यह भी कहा कि भारत अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां केवल कम लागत वाले इनोवेशन पर्याप्त नहीं रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली रिसर्च ही वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक ताकत बनेगी। भारत को ऐसी तकनीकों और अनुसंधान मॉडल पर काम करना होगा जो वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर सकें।
विश्वविद्यालयों और लैब्स को बनाना होगा अत्याधुनिक
नागेश्वरन के अनुसार, यदि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनना है तो देश की यूनिवर्सिटीज, रिसर्च लैब्स और तकनीकी संस्थानों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल शोधपत्र प्रकाशित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक चुनौती यह है कि रिसर्च को सीधे आर्थिक विकास, उद्योग और रोजगार सृजन से जोड़ा जाए। यही प्रक्रिया भारत को दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती प्रदान कर सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है। डिजिटल भुगतान, विनिर्माण, स्टार्टअप, अंतरिक्ष तकनीक और सेवा क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भले ही चुनौतीपूर्ण दिखाई दे, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सही नीतियों, तकनीकी निवेश और मानव संसाधन विकास के सहारे यह संभव हो सकता है।
आत्मनिर्भरता और तकनीकी नेतृत्व बनेगा आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत की सफलता ही उसकी आर्थिक ताकत तय करेगी। यदि भारत इन क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने में सफल होता है, तो 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना भी अधिक मजबूत आधार प्राप्त कर सकता है।