भोपाल/पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। दक्षिण पन्ना वन मंडल द्वारा पौध-रोपण स्थलों से एकत्रित 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताते हुए इसकी सराहना की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान से न केवल पौध-रोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।
68 हजार किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की रोकथाम
डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से लगभग 68 हजार किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने में सफलता मिली है। यह उपलब्धि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वन समितियों को हुई अतिरिक्त आय
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि अपशिष्ट समझे जाने वाले प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर स्थानीय वन समितियों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल से वन समितियों को 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।
पौध-रोपण स्थलों से चलाया गया विशेष संग्रहण अभियान
वन विभाग द्वारा वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न पौध-रोपण स्थलों पर वृक्षारोपण कार्य पूर्ण होने के बाद वहां बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों और अन्य प्लास्टिक सामग्री को एकत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
जेके सीमेंट संयंत्र में हुआ वैज्ञानिक निस्तारण
संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) के उद्देश्य से अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। वहां आधुनिक इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ESP) तकनीक की सहायता से प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से निस्तारण किया गया।
सतत विकास की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं।
पर्यावरण संरक्षण का बना मॉडल
दक्षिण पन्ना वन मंडल की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और उससे आय सृजन की यह प्रक्रिया अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है।