नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में यूपीआई के जरिए लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन दर्ज किए गए। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
मई में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड
मई 2026 के दौरान यूपीआई प्लेटफॉर्म पर 18.68 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। इन लेनदेन की कुल राशि करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और लोग नकदी की बजाय ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यूपीआई की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी सरलता और तेज़ प्रक्रिया मानी जा रही है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में भुगतान की सुविधा ने इसे आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक की पहली पसंद बना दिया है। यही वजह है कि हर महीने इसके उपयोग में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
बेंगलुरु, मुंबई और पुणे का रहा दबदबा
यूपीआई पूरे देश में लोकप्रिय हो चुका है, लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू और उपयोग के मामले में बड़े शहर अभी भी सबसे आगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा यूपीआई भुगतान केंद्र बनकर उभरा है। इसके बाद मुंबई और पुणे का स्थान रहा।
इन शहरों में बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, स्टार्टअप कंपनियां, आईटी सेक्टर के कर्मचारी और डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहक मौजूद हैं। इसके चलते यहां रोजाना होने वाले ऑनलाइन भुगतान की मात्रा अन्य शहरों की तुलना में काफी अधिक रहती है। यही वजह है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में इन शहरों का योगदान सबसे ज्यादा है।
छोटे शहरों में भी बढ़ रही डिजिटल क्रांति
विशेषज्ञों के अनुसार यूपीआई अब केवल मेट्रो शहरों की जरूरत नहीं रह गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। छोटे व्यापारियों, किराना दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों और ऑटो चालकों तक ने डिजिटल भुगतान को अपनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, ट्रांजैक्शन की संख्या के मामले में छोटे शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य के मामले में अभी भी बड़े शहरों का दबदबा कायम है। फिर भी यह बदलाव भारत में डिजिटल समावेशन की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
आखिर क्यों बढ़ रही है UPI की लोकप्रियता?
यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ी वजह इसकी आसान और तेज भुगतान प्रक्रिया है। उपयोगकर्ताओं को केवल क्यूआर कोड स्कैन करना होता है या मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी के जरिए सीधे भुगतान किया जा सकता है। इसके अलावा 24 घंटे उपलब्ध सेवा, न्यूनतम या शून्य शुल्क, बैंक खाते से सीधे भुगतान और सुरक्षित ट्रांजैक्शन जैसी सुविधाओं ने इसे लोगों की पसंद बना दिया है। यही कारण है कि छोटे भुगतान से लेकर बड़े लेनदेन तक यूपीआई का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है।
अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा बड़ा फायदा
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। नकद लेनदेन पर निर्भरता कम होने से वित्तीय पारदर्शिता बढ़ रही है और लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से दर्ज हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म न केवल डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इससे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जो लंबे समय में देश की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।