मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की मध्य विधानसभा से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा बैंक लोन फ्रॉड नहीं किया गया, बल्कि वो खुद बैंक लोन फ्रॉड का शिकार हुए हैं। इसका खुलासा चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान बैंक के तत्कालीन प्रबंधक के बयान से हुई है। जिसमें यह भी बताया गया कि विधायक और उनकी पत्नी को रिकवरी लेटर जारी नहीं किया गया था, बल्कि भ्रमित कर गिरोह ने इस पर साइन करवाए थे। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने इस बयान को संज्ञान में लेते हुए मामले पर अगली सुनवाई 24 नवम्बर को तय की है।
ये मामला 2023 के विधानसभा चुनाव के निकटतम प्रतिद्वंद्वी धु्रव नारायण सिंह की चुनाव याचिका से सामने आया था। उन्होंने चुनाव हलफनामे में लोन की जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर निर्वाचन को चुनौती दी थी। जिस पर विधायक मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दस्तावेजों को फर्जी बताया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हाईकोर्ट दस्तावेजों की जांच कर रहा है। इसी के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अशोका गार्डन शाखा के तत्कालीन मैनेजर को उपस्थित होने के आदेश दिए गए थे।
जबलपुर हाईकोर्ट में हुई पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह द्वारा चुनाव याचिका की गई शिकायत के मामले में सुनवाई के दौरान बैंक मैनेजर के बयान से खुलासा हुआ कि, लोन फ्रॉड का शिकार हुए कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, रिकवरी लेटर भी फर्जी है।