सावन के 7वें सोमवार को भगवान महाकाल जटाशंकर रूप में प्रजा को दर्शन देने के लिए निकलेंगे। नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग होने के कारण श्रद्धालुओं के अधिक संख्या में आने के अनुमान को देखते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक और अपर कलेक्टर संदीप कुमार सोनी ने बताया कि श्री महाकालेश्वर भगवान की सप्तम सवारी 21 अगस्त को शाम 4 बजे निकलेगी। इस दौरान पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद ,श्री घटाटोप मुखोटा और श्री जटाशंकर मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।
विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया
इसे लेकर कलेक्टर ने महाकाल मंदिर का निरीक्षण किया। इसके अलावा समस्त शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियो के लिए अवकाश घोषित किया गया है। पुजारी ने बताया कि, प्रथम पूजा है वो पूजा मंदिर को धोकर की जाएगी। फिर भगवान के दर्शन प्रारंभ हो जाएंगे। जिसके बाद सुबह 10 बजे शासकीय पूजा होती है, जिसमें जिला अधिकारी परिवार के साथ पूजन करते हैं। फिर शाम 7 बजे दोबारा पूजन होता है। संध्या आरती होती है और रात 11 से 12 बजे के बीच कपूर आरती करके द्वार साल भर के लिए फिर बंद कर दिए जाएंगे। इसी क्रम के साथ मंदिर में दर्शन 24 घण्टे निरंतर जारी रहेंगे। महेश पुजारी ने कहा कि, यहां जो नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा है उसको नेपाल से लाने की जानकारी भ्रामक है! प्रतिमा यही गढ़ी हुई है। पहले 12 माह मंदिर खुला रहता था। हादसों की संभावना को देखते हुए इसे साल में 1 दिन खोलने का निर्णय पुजारी पुरोहितों द्वारा लिया गया था।गाइडलाइन जारी की गई
सवारी के दौरान श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है। प्रशासक संदीप सोनी के अनुसार सवारी मार्ग में सडक की ओर व्यापारीगण भट्टी चालू न रखें और न ही तेल का कढाव रखें। दर्शनार्थी सवारी में उल्टी दिशा में न चलें और सवारी निकलने तक अपने स्थान पर खडे रहें। दर्शनार्थी गलियों में वाहन न रखें। श्रद्धालु सवारी के दौरान सिक्के , नारियल, केले, फल आदि न फैंकें। सवारी के बीच में प्रसाद और चित्र वितरण न करें। इसके अलावा पालकी के आसपास अनावश्यक संख्या में लोग न रहें।भजन मंडलियों के लिए गाइडलाइन
भजन मंडलियों के प्रमुख अपनी भजन मंडलियों में निर्धारित संख्या में रहने, ड्रेसकोड का पालन करने व मंदिर प्रबंध समिति द्वारा जारी किए गए अनुमति पत्र अनिवार्य रूप से धारण करने हेतु निर्देशित दिए गए हैं। सवारी में झांकी, शोभारथ, डीजे, मुखौटे, ठेले, फोटो, भजन मंडली के नाम व भगवान के बैनर के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति विशेष का प्रचार-प्रसार संबंधित बैनर, होर्डिंग आदि नहीं लगाया जाए।Read More: सावन के सातवें सोमवार पर आज नागपंचमी का योग, उज्जैन में खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट
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