CG NEWS : पौराणिक कथाओं की माने तो अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन से ही अमृत की प्राप्ति हुई लेकिन उसके साथ और भी कई चीजे मंथन से प्राप्त हुए थे। ऐसी मान्यता है कि कामधेनु गाय समुद्र मंथन से ही प्राप्त हुई थी और आज की गाय भी उन्हीं का रूप हैं। जिनके अंदर 33 कोटी देवी देवताओं का वास है। गाय का उपयोग लम्बे समय से कृषि के लिए किया जाता है और साथ ही गाये के दूध को अमृत तुल्य मानकर माताएं अपने बच्चों को पिलाती आई है। गाये का संबंध हमेशा से भारत के लाखो परिवारो से रहा है इसलिए समय-समय पर विभिन्न उत्सवों और त्योहार के रूप में गाय की पूजा आराधना भी की जाती है।
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हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक मास की अष्टमी को गोपाष्टमी की तरह मनाया जाता है जिसमें गाय की विशेष तौर पर पूजा आराधना की जाती है। कल गोपाष्टमी के दिन पिंजरापोल ट्रस्ट द्वारा संचालित गोकुलधाम गौशाला में ब्रज बिहारी सरकार का दरबार सजा, जहां बड़ी संख्या में पहुंचें श्रध्दालुओं को गौ की महत्ता के बारे मे बताया। वहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने गाय की पूजा अर्चना भी की और उसके पश्चात ब्रज बिहारी सरकार ने भजन के माध्यम से लोगों को जीवन का सार समझाया औेर लोग भी मन्त्रमुग्ध होकर ईश्वर की आराधना करते नजर आये।
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