जहां एक ओर सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा के दिग्गज नेता मध्यप्रदेश का दौरा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर 18 महीने तक सीएम रहने वाले कमलनाथ भी सत्ता पक्ष पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दूसरी ओर चुनावी साल में नेताओं के दल बदल का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं ने घर वापसी की है, जिसे लेकर सियासी गलियारों में हल्ला होना शुरू हो गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आने वाले कई नेताओं को भाजपा ने टिकट नहीं देने का फैसला किया है, जिसके बाद से कई नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो गया है।
जहां एक ओर सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा के दिग्गज नेता मध्यप्रदेश का दौरा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर 18 महीने तक सीएम रहने वाले कमलनाथ भी सत्ता पक्ष पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दूसरी ओर चुनावी साल में नेताओं के दल बदल का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं ने घर वापसी की है, जिसे लेकर सियासी गलियारों में हल्ला होना शुरू हो गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आने वाले कई नेताओं को भाजपा ने टिकट नहीं देने का फैसला किया है, जिसके बाद से कई नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो गया है।
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