छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए डेयरी उत्पादों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। राज्य में अब ऐसे एनालॉग पनीर (Analog Paneer) और अन्य गैर-दुग्ध डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है, जो देखने या पैकेजिंग में असली डेयरी उत्पाद जैसे प्रतीत होते हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को भ्रामक उत्पादों से बचाना है।
आखिर क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद होता है जिसे पारंपरिक दूध आधारित पनीर की तरह तैयार नहीं किया जाता। इसमें कई मामलों में दूध या दुग्ध वसा की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग किया जाता है। यदि ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग या लेबलिंग इस तरह की जाए कि उपभोक्ता उन्हें असली पनीर समझ लें, तो इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी प्रकार के उत्पादों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
किन उत्पादों पर लागू होगा प्रतिबंध?
राजपत्र के अनुसार प्रतिबंध मुख्य रूप से उन उत्पादों पर लागू होगा-
ऐसे डेयरी एनालॉग उत्पाद जो वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं।
जिनमें दूध या दुग्ध वसा के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग किया जाता है।
जिनकी पैकेजिंग, लेबलिंग या प्रस्तुति उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है कि वे वास्तविक डेयरी उत्पाद खरीद रहे हैं।
ऐसे अमानकीकृत उत्पाद जो पनीर, क्रीम, मक्खन या अन्य डेयरी उत्पादों के समान दिखते हैं लेकिन निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते।
किन उत्पादों को मिली छूट?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी गैर-दुग्ध उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। कुछ मानकीकृत खाद्य उत्पादों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। इनमें शामिल हैं-
फ्रोजन डेजर्ट
प्रोसेस्ड चीज
मिक्स्ड फैट स्प्रेड
ये उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार अलग श्रेणी में आते हैं, इसलिए इन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
किस कानून के तहत लिया गया फैसला?
राज्य सरकार ने यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18 और 30 के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करते हुए की है। सरकार का कहना है कि बाजार में ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाना आवश्यक था, जो उपभोक्ताओं को वास्तविक डेयरी उत्पाद होने का भ्रम पैदा कर सकते हैं।
कितने समय तक प्रभावी रहेगा आदेश?
राजपत्र में प्रकाशित आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध-
अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से प्रभावी हो चुका है। यह एक वर्ष तक लागू रहेगा। यदि इससे पहले FSSAI इस विषय पर अंतिम नियम जारी कर देता है, तो वही नियम प्रभावी होंगे और राज्य का यह आदेश उसी के अनुसार लागू माना जाएगा।
कारोबारियों को क्या करना होगा?
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने राज्य के सभी खाद्य कारोबार संचालकों, वितरकों, निर्माताओं और संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कारोबारी प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पादों का निर्माण, भंडारण, परिवहन या बिक्री करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने पहले ही कर दी थी घोषणा
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने 30 जुलाई को सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। इसके अगले दिन सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जारी कर इस निर्णय को औपचारिक रूप से लागू कर दिया। सरकार का मानना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी खाद्य विकल्प मिलेंगे और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भरोसा मजबूत होगा।
उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बाजार में बिकने वाले डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता और लेबलिंग पर अधिक निगरानी रहेगी। उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय उत्पाद की सामग्री (Ingredients) और लेबल को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जा रही है ताकि वे वास्तविक डेयरी उत्पाद और डेयरी एनालॉग के बीच अंतर समझ सकें।