बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का वैध और पात्र दावेदार हो सकता है। हालांकि, यदि एक ही श्रेणी में दो बेटे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हों, तो उम्र में बड़े बेटे को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दूसरी शादी से जन्मे बेटे को केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। लेकिन जब दोनों दावेदार एक ही श्रेणी में आते हों और दोनों नियुक्ति के लिए पात्र हों, तब ज्येष्ठता यानी उम्र में बड़े होने के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुंगेली जिले के धर्मपुरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ रहे प्यून ईश्वर सिंह क्षत्रिय की मृत्यु से जुड़ा है। ईश्वर सिंह का 29 सितंबर 2016 को सेवा के दौरान निधन हो गया था।मृतक कर्मचारी ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी उषा बाई से उनका बड़ा बेटा जितेन्द्र सिंह है, जिसकी उम्र 35 वर्ष है। वहीं दूसरी पत्नी मिलाउकिन बाई से छोटा बेटा राजकुमार है।
पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों के बीच अनुकंपा नियुक्ति को लेकर सहमति नहीं बन सकी। दोनों ने सरकारी नौकरी पर अपना दावा पेश किया। मामला विभाग के सामने पहुंचा तो अधिकारियों ने नियुक्ति का फैसला लेने से पहले दोनों दावेदारों के बीच यह तय करने को कहा कि नौकरी किसे दी जानी है।
दूसरी पत्नी के बेटे के अधिकार पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह सवाल भी आया कि क्या दूसरी शादी से जन्मा बेटा अनुकंपा नियुक्ति का पात्र हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित नियमों के तहत दूसरी शादी से जन्मे बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र माना जा सकता है।यानी केवल यह तथ्य कि बेटा मृतक कर्मचारी की दूसरी पत्नी से पैदा हुआ है, उसे अनुकंपा नियुक्ति के दावे से बाहर करने का आधार नहीं बन सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब एक ही श्रेणी में दो पात्र दावेदार मौजूद हों, तब दोनों को समान रूप से नियुक्ति देने का सवाल नहीं उठता। ऐसी स्थिति में प्राथमिकता तय करने के लिए ज्येष्ठता का सिद्धांत लागू किया जा सकता है।
दो भाई पात्र हों तो बड़े भाई को मिलेगी पहली प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ सरकार के वर्ष 2013 के सर्कुलर और उसके संशोधित प्रावधानों में एक ही श्रेणी के दो दावेदारों के बीच प्राथमिकता तय करने को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसी बिंदु पर हाईकोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के राज किशोर बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि एक ही परिवार में दो भाई अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हैं, तो ज्येष्ठता के आधार पर उम्र में बड़े भाई को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि बड़ा भाई नियुक्ति लेने से इनकार कर देता है या किसी वजह से वह अयोग्य पाया जाता है, तभी छोटे भाई के दावे पर विचार किया जा सकता है।
35 वर्षीय जितेन्द्र सिंह को मिलेगी पहली प्राथमिकता
इस मामले में मृतक कर्मचारी की पहली पत्नी उषा बाई से जन्मे जितेन्द्र सिंह की उम्र 35 वर्ष है, जबकि दूसरी पत्नी से जन्मा राजकुमार छोटा बेटा है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार दोनों के दावे पर विचार संभव है, लेकिन उम्र में बड़े होने के कारण जितेन्द्र सिंह को पहली प्राथमिकता मिलेगी।
इस तरह कोर्ट के आदेश के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए बड़े बेटे का दावा मजबूत हो गया है। यदि वह नियुक्ति स्वीकार करता है और पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करता है, तो छोटे भाई के दावे पर प्राथमिकता के आधार पर विचार नहीं किया जाएगा।
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण नजीर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद एक से अधिक आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा करते हैं। कोर्ट ने एक ओर दूसरी शादी से जन्मे बेटे के अधिकार को स्वीकार किया है, वहीं दूसरी ओर एक ही श्रेणी के दो पात्र दावेदारों के बीच प्राथमिकता तय करने के लिए उम्र में बड़े दावेदार को आगे रखने का सिद्धांत स्पष्ट किया है।
इस फैसले से भविष्य में ऐसे मामलों में विभागों को दावेदारों की पात्रता के साथ-साथ उनकी आपसी प्राथमिकता तय करने में भी मार्गदर्शन मिल सकता है।