रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासन को अधिक जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे आम नागरिकों के साथ विनम्रता, धैर्य और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि मुख्यालय से लेकर फील्ड स्तर तक अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं और उनका व्यवहार ही सरकार की छवि तय करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों की समस्याओं को सुनना प्रशासन का पहला दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि वे लोगों की बातों को गंभीरता से सुनें और समाधान-केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाएं। उनके अनुसार संवाद तभी प्रभावी होता है, जब उसमें संवेदना और समाधान की भावना हो।
जनसमस्याओं के समाधान पर जोर
सीएम साय ने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई नागरिक सरकारी कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसे सम्मान मिल रहा है। यही अनुभव जनता में विश्वास पैदा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से आंकी जाती है। इसलिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर सीधे जनता से संवाद करना चाहिए और उनकी जरूरतों के अनुसार काम करना चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने काम का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ शालीन और विनम्र व्यवहार भी जरूरी है।
सीएम साय ने कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सहयोगात्मक और सरल व्यवहार अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वतः अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों में कमी आती है।उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने।
सीएम करेंगे आकस्मिक निरीक्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अधिकारियों के काम के साथ-साथ उनके व्यवहार का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
सुशासन तिहार 2026 का आयोजन
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक किया जा रहा है। इस दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर आवेदन लेकर जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी होगी और स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के समाधान की समीक्षा की जाएगी।