रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और प्रकृति से जुड़ा हरेली तिहार आज पूरे प्रदेश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। गांवों से लेकर शहरों तक हरेली की रौनक देखने को मिल रही है। इस मौके पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संस्कृति और कृषि विभाग की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री निवास का कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा। यहां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति, ग्रामीण जीवन और कृषि परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। वहीं रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर भी सुबह 11:30 बजे से हरेली तिहार कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
गेड़ी से लेकर पारंपरिक खेलों तक दिखेगा छत्तीसगढ़ी रंग
हरेली तिहार के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में खेती-किसानी से जुड़ी पारंपरिक पूजा का आयोजन होगा। किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों हल, कुदाली और फावड़े की पूजा करते हैं। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं के लिए खास आकर्षण गेड़ी और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल होंगे। गेड़ी पर चढ़कर युवा और बच्चे उत्सव का आनंद लेते नजर आएंगे।
लोक कलाकारों की प्रस्तुति और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद
हरेली उत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी विशेष स्थान दिया गया है। कार्यक्रम में लोक कलाकार पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही मेहमानों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखने का अवसर मिलेगा। आयोजन के जरिए राज्य की लोक कला, खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की पहल
हरेली तिहार केवल कृषि से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पहचान और लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, लोक कलाओं और पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ना भी है। आधुनिक दौर में पारंपरिक त्योहारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस तरह के आयोजनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हरेली तिहार क्यों मनाया जाता है?
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक पर्वों में से एक है। यह श्रावण मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से हरियाली, खेती, प्रकृति और अच्छी फसल की कामना से जुड़ा है। मानसून के दौरान खेतों में हरियाली आने के बाद किसान प्रकृति और कृषि के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इस दिन खेती में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा की जाती है।
बैल और पशुधन की भी होती है पूजा
हरेली के मौके पर किसान अपने बैल और अन्य पशुधन के प्रति भी सम्मान प्रकट करते हैं। पशुओं को नहलाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। कृषि आधारित छत्तीसगढ़ी समाज में पशुधन का विशेष महत्व रहा है। खेती के काम में बैलों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण हरेली में उनकी पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
हरियाली और समृद्धि का संदेश देता है हरेली
हरेली तिहार प्रकृति के प्रति सम्मान और अच्छी फसल, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना का पर्व है। यही वजह है कि आज पूरे छत्तीसगढ़ में गांवों से लेकर राजधानी रायपुर तक हरेली का उत्सवी माहौल देखने को मिल रहा है।