छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी, सभी आरोपियों पर समान दृष्टिकोण जरूरी
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में सहभागिता का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ कृत्रिम भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि सभी के खिलाफ साक्ष्य समान हैं, तो बिना ठोस कारण के किसी एक को बरी करना न्यायसंगत नहीं है।
2003 में हुई थी हत्या, 31 आरोपी बनाए गए थे
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से कुछ बाद में सरकारी गवाह बन गए थे।
पहले ट्रायल में बरी हुए थे अमित जोगी
प्रारंभिक सुनवाई में अमित जोगी को छोड़कर 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था, जिसके बाद अब यह ऐतिहासिक फैसला सामने आया है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।