पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा भाजपा सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण मध्यप्रदेश दिवालियापन की कगार पर पहुंच रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा प्रदेश सरकार हर साल क़रीब 58 हजार करोड़ रुपया कर्ज़ या कर्ज़ के ब्याज के रूप में चुकाती है।यह स्थिति तब है जब मध्यप्रदेश के नागरिक डीज़ल और पेट्रोल पर सबसे ज़्यादा वेट चुकाते हैं। मकान की रजिस्ट्री पर सबसे ज़्यादा शुल्क चुकाते हैं। वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर सबसे ज़्यादा फ़ीस देते हैं। आबकारी विभाग को सबसे ज़्यादा टैक्स देते हैं। नेशनल हाईवे के अलावा राज्य सरकार की सड़कों पर चलने के लिए भी टोल टैक्स चुकाते हैं।
हर महीने करीब 5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज
जनता से जमकर टैक्स वसूलने के बावजूद सरकार की कोशिश होती है कि वह यह साबित करे कि जनकल्याण की योजनाओं पर ख़र्च के कारण सरकारी ख़ज़ाने पर बोझ पड़ रहा है।लेकिन सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बंदरबांट के कारण मध्यप्रदेश पर आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद अपने फ़िज़ूल के खर्चों में कटौती करने के बजाय भाजपा सरकार हर महीने क़रीब 5 हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ लेती जा रही है।
प्रदेश में उद्योग और व्यापार की प्रगति बहुत धीमी
रिपोर्ट स्पष्ट बताती है कि माइनिंग और GST से राज्य सरकार को उतनी आमदनी नहीं हो रही है जितनी की होनी चाहिए।इसका सीधा मतलब है कि खनन क्षेत्र में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है और जो पैसा सरकारी ख़ज़ाने में जाना चाहिए वह भाजपा नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं की जेब में जा रहा है।इसी तरह GST का कम का संकलन होना यह बताता है कि प्रदेश में उद्योग और व्यापार की प्रगति बहुत धीमी है।आर्थिक गतिविधि सुस्त पड़ गई है। आर्थिक गतिविधि का सुस्त पड़ना इस बात का संकेत है कि प्रदेश की क़ानून व्यवस्था ख़राब है और लाल फ़ीताशाही के कारण लोग उद्योग और व्यापार सही ढंग से संचालित नहीं कर पा रहे हैं।बेहतर होगा कि जनकल्याण की योजनाओं पर ठीकरा फोड़ने की जगह भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर नकेल कसे, परियोजनाओं का वास्तविक बजट बनाए, न कि भ्रष्टाचार के लिए ख़र्च बढ़ा दे। अगर वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया तो मध्यप्रदेश का वित्तीय संकट लाइलाज हो जाएगा।
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