मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी बंगलों को खाली करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सबके लिए समान हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों में रहने वाले पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और अधिकारियों को अब ‘बेदखली’ का डर सताने लगा है।
सख्त रुख अपनाया गया
सरकार ने अब पात्रता समाप्त होने के बावजूद सरकारी बंगलों में बने रहने वाले पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। इसके अलावा 4 आईएएस अधिकारियों और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।
सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए कार्रवाई
राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जा जमाने वालों के खिलाफ सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्री और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसद अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़ पाए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि निर्धारित समय तक बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा।
प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक अल्टीमेटम
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने का अंतिम समय 13 जनवरी रखा गया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन ‘बल प्रयोग’ करेगा।
पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस
पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, जो 2023 में चुनाव हार गए थे, ने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) अभी तक नहीं छोड़ा है।
पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर कब्जा
मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो गई, लेकिन वे सरकारी बंगलों का मोह छोड़ नहीं पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे नेता 2023 का चुनाव हार चुके हैं, फिर भी सरकारी बंगलों पर कब्जा बनाए हुए हैं। पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी इसी श्रेणी में शामिल हैं।
सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस
संपदा संचालनालय ने कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया गया था। रामपाल सिंह को भी चेतावनी दी जा चुकी है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा।
भारी जुर्माने की नीति
विधि विभाग ने सख्त नियम लागू कर भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दी है। प्रारंभिक तीन महीनों तक सामान्य किराया लगेगा, लेकिन उसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया लगेगा। छह महीने बाद कब्जा जारी रहा तो 30 गुना ज्यादा हर्जाना देना होगा।
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