अक्षय तृतीया जैसे शुभ पर्व को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने सामाजिक कुरीति बाल विवाह पर पूर्ण रोक लगाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। इस दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों के प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी परिस्थिति में बाल विवाह की घटनाएं न होने दी जाएं।
जिलों में कंट्रोल रूम और निगरानी तंत्र
सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिलों में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं, जो 24 घंटे निगरानी करेंगे। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में उड़न दस्तों का गठन किया गया है, जो मौके पर पहुंचकर संदिग्ध आयोजनों की जांच करेंगे। प्रशासन को सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की पूर्व सूची तैयार करने और उनकी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान के तहत तेज हुई कार्रवाई
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हाल के सर्वेक्षणों में बाल विवाह के मामलों में कमी जरूर आई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह समस्या अभी भी बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शून्य बाल विवाह का लक्ष्य निर्धारित कर विशेष अभियान को और अधिक सशक्त बनाया है।
शिक्षा संस्थानों में जागरूकता
सरकार ने केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि जागरूकता पर भी जोर दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया जाएगा, ताकि समाज में इस कुरीति के प्रति समझ विकसित हो सके। युवाओं को इस अभियान का भागीदार बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जनप्रतिनिधियों की सामूहिक भागीदारी
20 अप्रैल को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों द्वारा बाल विवाह न होने देने की शपथ ली जाएगी। पंचायत और वार्ड स्तर पर बैनर और पोस्टर के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस सामूहिक प्रयास का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को इस मुहिम से जोड़ना है।
सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम
सरकार की यह पहल केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसर पर इस कुरीति को समाप्त करने का संकल्प एक नई सामाजिक चेतना का संकेत देता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सके।