भोपाल | मध्यप्रदेश के कारीगरों और शिल्पियों को अब अपने हुनर को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए नया डिजिटल मंच मिल गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “मृगनयनी” ई-कॉमर्स पोर्टल[www.themrignayanee.com] का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह पोर्टल जल्द ही Open Network for Digital Commerce से जुड़कर कारीगरों को व्यापक डिजिटल बाजार उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी कला को “लोकल से ग्लोबल” तक पहुंचाने का रास्ता आसान होगा।
ई-कॉमर्स से बदलेगी कारीगरों की तस्वीर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल को कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आज का दौर डिजिटल है और ऐसे में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म कारीगरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल बायर-सेलर मॉडल पर आधारित है, जिससे शिल्पी सीधे ग्राहकों से जुड़ सकेंगे और उन्हें अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा। इससे न केवल आय में वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
“वोकल फॉर लोकल” को मिलेगा डिजिटल बल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से ई-कॉमर्स की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह पोर्टल प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
तेजी से बढ़ेगा उत्पादों और कारीगरों का दायरा
फिलहाल इस पोर्टल पर 15 श्रेणियों में लगभग 350 उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें अगले एक माह में बढ़ाकर 1500 करने की योजना है। आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म से 2 लाख से अधिक कारीगरों को जोड़ने और 10 लाख उत्पादों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह एक बड़ा डिजिटल बाजार बन सके।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
यह पहल “आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को मजबूत करती है। इसके जरिए प्रदेश के हस्तशिल्प और हाथकरघा उत्पाद देश-विदेश तक पहुंचेंगे, वहीं जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। साथ ही युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।