इस बार मध्य प्रदेश में खरीफ़ सीजन के दौरान धान का बंपर उत्पादन हुआ, जिससे राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर धान उपार्जन किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में 51.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हुई है, जो खेती-किसानी की मजबूत स्थिति और किसानों के परिश्रम का प्रमाण है। उपार्जन की यह मात्रा कृषि क्षेत्र में बढ़ती उत्पादकता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
किसानों के खातों में 12 हज़ार करोड़ की राशि
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई खरीद के बाद कुल 12 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है। सरकार इसका अधिकांश भुगतान पहले ही कर चुकी है और शेष राशि भी शीघ्र अंतरित कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो गई है।
समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से किसानों को मिला लाभ
धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इस वर्ष वृद्धि की गई है, जिसने किसानों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ दिया है। इस खरीफ़ सीजन में धान का एमएसपी 2369 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया, जो पिछली बार की तुलना में 69 रुपए अधिक है। इस बढ़ोतरी ने किसानों की आमदनी को सीधे प्रभावित किया है और बढ़ी हुई कीमतों ने उपार्जन प्रक्रिया को और आकर्षक बनाया है। इससे किसानों में उत्साह बढ़ा है और वे अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल प्राप्त कर रहे हैं।
बड़े पैमाने पर किसानों का पंजीयन और उपार्जन प्रक्रिया
इस खरीफ़ सत्र में कुल 8 लाख 59 हज़ार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन किया गया, जिनमें से 7 लाख 89 हज़ार 757 किसानों ने स्लॉट बुक करके धान उपार्जन में हिस्सा लिया। यह भागीदारी बताती है कि राज्य सरकार की नीतियों पर किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है। सुव्यवस्थित स्लॉट बुकिंग प्रणाली और व्यापक प्रशासनिक तैयारी ने उपार्जन कार्य को सरल बनाया, जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
किसानों के लिए बड़ी आर्थिक राहत
उपार्जित धान के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंका गया है, जिसमें से लगभग 11 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में पहले ही ट्रांसफर किए जा चुके हैं। शेष राशि भी शीघ्र ही भेज दी जाएगी। यह राशि न केवल किसानों की वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करेगी बल्कि अगली फसल की तैयारियों में भी उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएगी। सरकार का यह कदम किसानों की भलाई और कृषि क्षेत्र के विकास के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Comments (0)