लोकसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार UIDAI ने जिन आधार नंबरों को रद्द किया है, वे सभी उन व्यक्तियों के थे जिनका निधन हो चुका था। लंबे समय से यह समस्या सामने आ रही थी कि मृत्यु के बाद भी कई बार मृत व्यक्तियों के आधार का इस्तेमाल योजनाओं का लाभ लेने, धोखाधड़ी करने या वित्तीय हेराफेरी जैसी गतिविधियों में किया जा रहा था। ऐसे मामलों को खत्म करने और डाटाबेस को पूर्णतः सुरक्षित व सटीक रखने के लिए इन ‘मृत खातों’ को सिस्टम से हटा दिया गया। फिलहाल देश में लगभग 134 करोड़ आधार नंबर सक्रिय हैं, जिससे साफ है कि UIDAI डाटाबेस को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
पहचान सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सकारात्मक प्रभाव
आधार नंबर रद्द होने से सरकार की उन योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, जिनमें पहचान सत्यापन की आवश्यकता होती है। मृत व्यक्तियों के आधार से जुड़े फर्जी लेनदेन, लाभ उठाने के मामले और गलत दस्तावेज़ों के आधार पर की जाने वाली गतिविधियां अब काफी हद तक रुक जाएंगी। यह कदम न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को विश्वसनीय बनाएगा बल्कि लाभार्थियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा जनसंख्या व सामाजिक डाटा की सही गणना में भी यह साफ-सफाई एक अहम भूमिका निभाएगी।
नया आधार ऐप: डिजिटल पहचान की दिशा में बड़ा बदलाव
UIDAI ने इस सफाई अभियान के साथ ही एक नया आधार ऐप भी पेश किया है, जो पुराने mAadhaar ऐप की तुलना में अधिक उन्नत और तकनीक-सक्षम है। यह ऐप उपयोगकर्ताओं के लिए कहीं अधिक सुविधाजनक है क्योंकि यह फिजिकल आधार कार्ड रखने की आवश्यकता को लगभग समाप्त कर देता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि एक ही ऐप में कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के पांच सदस्यों तक के प्रोफाइल जोड़ सकता है, जिससे यह एक संपूर्ण परिवार-केन्द्रित डिजिटल पहचान समाधान बन जाता है। इस ऐप के माध्यम से मोबाइल नंबर बदलने की सुविधा भी घर बैठे उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को अब सेवा केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सुरक्षा सुविधाओं से और मजबूत हुआ आधार सिस्टम
नए ऐप में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें बायोमेट्रिक लॉक और सिम-बाइंडिंग जैसी विशेषताएं शामिल हैं, जिसके चलते यह ऐप केवल उसी फोन में चलता है जिसमें आधार से लिंक किया गया सिम कार्ड मौजूद हो। इस फीचर से उपयोगकर्ता की पहचान और डाटा सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। पहचान सत्यापन के लिए अब QR कोड आधारित वेरिफिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे पहचान दिखाने के पारंपरिक तरीकों की आवश्यकता कम हो जाएगी। यह सुविधा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी है जहां तेज़, सुरक्षित और बिना संपर्क के पहचान की पुष्टि करनी हो।
आधार पहचान है, नागरिकता नहीं—सुरक्षा को दें प्राथमिकता
सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आधार पहचान का दस्तावेज़ है, नागरिकता का नहीं। लेकिन चूंकि आधार अब बैंक खाते, मोबाइल नंबर, आयकर और अधिकांश सरकारी सुविधाओं से जुड़ चुका है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना नागरिकों के लिए बेहद जरूरी है। UIDAI जल्द ही नए ऐप में नाम और ईमेल अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराने वाला है, जिससे उपयोगकर्ताओं को और अधिक स्वतंत्रता और सुविधा मिल सकेगी। यह समग्र बदलाव डिजिटल पहचान प्रणाली को और अधिक मजबूत, प्रभावी और उपयोगकर्ता-हितैषी बनाएगा।
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