भारतीय रेल में आरएसी टिकट प्रणाली दशकों से लागू है, जिसके तहत यात्री को यात्रा का अधिकार तो मिलता है, लेकिन उसे पूर्ण बर्थ उपलब्ध नहीं होता। यात्री को आधी सीट पर सफर करना पड़ता है, जबकि किराया पूर्ण बर्थ के बराबर लिया जाता है। यही व्यवस्था लंबे समय से यात्रियों में असंतोष और प्रश्न खड़े करती रही है कि जब सुविधा आधी है, तो किराया पूरा क्यों लिया जाता है। यह विसंगति विशेष रूप से लंबी दूरी के सफर में अधिक कष्टप्रद हो जाती है, जहां यात्री को यात्रा का आधा हिस्सा भी ठीक से विश्राम करने का अवसर नहीं मिलता।
संसदीय समिति की सख्त टिप्पणी और नई दिशा
इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि आरएसी पर यात्रा करने वाले यात्री से पूरा किराया वसूलना न्यायसंगत नहीं है। समिति का कहना है कि चार्ट तैयार होने के बाद भी यदि यात्री का आरएसी स्टेटस बरकरार रहता है और उसे केवल आधी सीट पर ही संतोष करना पड़ता है, तो यह स्थिति रेलवे की सेवा गुणवत्ता और न्यायिक मानकों से मेल नहीं खाती। समिति ने माना कि जब पूर्ण सुविधा नहीं मिल रही, तो किराये का पूरा भुगतान यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ के समान है।
किराया वापसी की सिफारिश और संभावित मॉडल
लोक लेखा समिति ने रेलवे को सुझाव दिया है कि वह ऐसी व्यवस्था विकसित करे, जिसमें चार्ट तैयार होने के बाद भी पूर्ण बर्थ न मिलने वाले यात्रियों को आंशिक किराया वापस किया जा सके। यह मॉडल एयरलाइंस और अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पहले से मौजूद यात्री-अनुकूल प्रावधानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यदि यह लागू होता है, तो रेलवे को स्पष्ट मानक तय करने होंगे कि आधी सीट के लिए कितना किराया लिया जाए और कितना लौटाया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों के अधिकारों और सुविधा को प्राथमिकता देना होगा।
रेलवे के लिए चुनौती और सुधार का अवसर
इस सिफारिश के लागू होने से रेलवे के सामने चुनौतियाँ भी खड़ी होंगी। टिकटिंग सिस्टम में तकनीकी बदलाव, किराया गणना के अतिरिक्त पैरामीटर, रिफंड प्रक्रिया और यात्रियों को जानकारी उपलब्ध कराने की जटिलता रेलवे को सावधानीपूर्वक संभालनी होगी। हालांकि यह भारतीय रेलवे के लिए यात्रियों के हित में किए जाने वाले सबसे बड़े सुधारों में से एक हो सकता है। यह कदम रेलवे की छवि को जन-अनुकूल और पारदर्शी बनाने में भी प्रभावी योगदान देगा।
यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब होगा
यदि सिफारिशें स्वीकार की गईं, तो आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह राहत विशेष महत्व रखेगी। इसके अलावा यह सुधार रेलवे में विश्वास बढ़ाने, अनावश्यक शिकायतों को कम करने और टिकटिंग प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह पहल भविष्य में रेलवे की सेवाओं को यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जाएगी।
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