भोपाल। भोपाल समेत मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में अब अस्पतालों का स्टॉक और सामान पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) लागू करने की तैयारी कर ली है। इससे मरीजों के साथ-साथ अस्पताल में उपलब्ध कुर्सी, पलंग, चादर, फर्नीचर और अन्य सभी सामग्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाएगा।
अब तक की व्यवस्था और उसकी सीमाएं
अभी तक अस्पतालों में सामग्री का रिकॉर्ड मैन्युअल रजिस्टर में रखा जाता था। इससे स्टॉक मिसमैच, समय से पहले सामान को कंडम दिखाने, जरूरत पड़ने पर सामग्री न मिलने और अन्य गड़बड़ियों की शिकायतें आम थीं। कई बार सामान गायब हो जाता था और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता था।
IMS लागू होने के बाद क्या बदलाव होंगे
नई प्रणाली में प्रत्येक सामान की डिजिटल फाइल तैयार होगी, जिसमें दर्ज होगा कि कब खरीदा गया, किस वार्ड को दिया गया, कब वापस आया और वर्तमान स्थिति क्या है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एक क्लिक पर किसी भी जिले के अस्पताल का स्टॉक देख पाएंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी। IMS अगले 2-3 महीने में पूरी तरह लागू होने का अनुमान है।
फर्नीचर, लिनन और उपकरणों की भी निगरानी
पहले ही उपकरणों के लिए ईक्यूएमआईएस (इक्यूबमेंट मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम) लागू किया जा चुका है, जिससे खराब मशीनों की मरम्मत एक हफ्ते में सुनिश्चित होती है। IMS के तहत अब फर्नीचर, लिनन और अन्य सामग्री की भी निगरानी होगी। कुर्सी, पलंग और लिनन तक का डिजिटल हिसाब रखा जाएगा, जिससे मेंटेनेंस और रिपेयरिंग में तेजी आएगी।
स्टोर की मनमानी पर लगेगा ब्रेक
अस्पतालों में स्टोर मैनेजमेंट सबसे कमजोर कड़ी रही है। स्टॉक में अंतर, समय से पहले कंडम दिखाना और जरूरत पर सामग्री न मिलना जैसी शिकायतें आम थीं। IMS लागू होने के बाद ये गड़बड़ियां सिस्टम में सीधे दिखेंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्टाफ की जवाबदेही तय होगी।
अस्पतालों और मरीजों के लिए फायदे
IMS के लागू होने से अस्पतालों में स्टॉक की स्थिति हमेशा स्पष्ट रहेगी। मरीजों को समय पर जरूरत की सामग्री और सुविधाएं मिलेंगी। कर्मचारियों पर भी जवाबदेही तय होगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा। यह कदम मध्यप्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में डिजिटल सुधार की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा।