भोपाल। मध्यप्रदेश में राजनीतिक पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा नेताओं का इंतजार लंबा हो गया है। निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां करीब एक महीने के लिए टाल दी गई हैं। फिलहाल संगठन स्थानीय स्तर पर नेताओं को एडजस्ट करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
चुनाव के बाद शुरू होगी नियुक्तियां
भाजपा का फोकस इस समय पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, निगम-मंडलों में नियुक्त किए जाने वाले अधिकांश नाम तय हो चुके हैं, लेकिन उनकी घोषणा चुनाव परिणाम के बाद ही की जाएगी। संभावना है कि 4 मई को नतीजे आने के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी।
एल्डरमैन नियुक्तियों पर जोर
राज्य सरकार इस समय नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। अब तक 169 नगर परिषद और नगर पालिकाओं में एल्डरमैन की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि अभी 244 निकायों में नियुक्तियां होना बाकी हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की कार्यपरिषद में भी संगठन से जुड़े लोगों को जगह दी जा रही है।
‘निगम-मंडल छोटा विषय’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने निगम-मंडल नियुक्तियों को छोटा विषय बताया है। उनका कहना है कि इन पदों पर सीमित संख्या में ही लोगों को मौका मिलता है, जबकि पार्टी का फोकस हजारों कार्यकर्ताओं को विभिन्न समितियों और इकाइयों में जिम्मेदारी देने पर है।
जनभागीदारी और संगठन पर फोकस
पार्टी फिलहाल जनभागीदारी समितियों के गठन, संगठनात्मक मोर्चों में नियुक्तियों और निचले स्तर की इकाइयों को मजबूत करने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को सक्रिय भूमिका देना है, ताकि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके। निगम-मंडलों में नियुक्तियां चुनावी माहौल के शांत होने के बाद ही होने की संभावना है।