बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही बुधवार को ‘सरके चुनर’ विवाद को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश हुईं। आयोग की ओर से आखिरी चेतावनी दिए जाने के बाद नोरा ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित माफी सौंपी। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उनके गाने से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुईं और इसके लिए उन्होंने खेद जताया।
नोरा ने आयोग के सामने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसे किसी भी आइटम सॉन्ग का हिस्सा नहीं बनेंगी, जिससे सामाजिक या सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की आशंका हो। इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भी इस मुद्दे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
‘किसी का दिल दुखाना मकसद नहीं था’
मीडिया से बातचीत करते हुए नोरा ने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ, वह अनजाने में हुआ और वह इस पूरे घटनाक्रम से बेहद दुखी हैं।
नोरा ने आयोग की कार्यवाही के बाद बाहर निकलते समय कहा कि उन्हें अचानक ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने उनकी बात को गंभीरता से सुना और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें माफ कर दिया।
अनाथ बच्चों की पढ़ाई का उठाएंगी खर्च
इस पूरे विवाद के बीच नोरा फतेही ने एक सामाजिक पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अपनी गलती के प्रायश्चित स्वरूप वह अनाथ बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करेंगी।
नोरा के इस फैसले को कई सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समाज के लिए आगे आते हैं, तो इसका व्यापक संदेश जाता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मनोरंजन जगत को अब कंटेंट चयन के दौरान सामाजिक संवेदनशीलता पर अधिक ध्यान देना होगा।
पहले संजय दत्त भी मांग चुके हैं माफी
इस विवाद में इससे पहले अभिनेता संजय दत्त भी राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं। 27 अप्रैल को हुई सुनवाई में उन्होंने भी अपनी ओर से माफी मांगते हुए 50 आदिवासी बेटियों की शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा की थी।
उस समय नोरा फतेही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुई थीं और उनकी ओर से केवल वकील आयोग के सामने पेश हुआ था। यही वजह रही कि आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी जारी कर दोबारा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
मनोरंजन जगत में बढ़ी जिम्मेदारी की बहस
‘सरके चुनर’ विवाद ने एक बार फिर फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज़ में प्रस्तुत किए जाने वाले कंटेंट को लेकर बहस तेज कर दी है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों का कहना है कि लोकप्रिय कलाकारों को अपनी प्रस्तुतियों के सामाजिक प्रभाव को समझना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में किसी भी गाने या दृश्य का प्रभाव बहुत तेजी से व्यापक समाज तक पहुंचता है। ऐसे में मनोरंजन और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना कलाकारों और निर्माताओं दोनों के लिए जरूरी हो गया है। नोरा फतेही की माफी और उनके फैसले को इसी बदलते सामाजिक दबाव और जागरूकता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।