जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। दशकों पुरानी इस संधि को लेकर भारत ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं की जाएगी। इसके बाद भारत ने अपने हिस्से के जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में कई बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए।
बैराजों की सफाई और जल भंडारण पर युद्धस्तर पर काम
भारत इस समय जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत में जल संरचनाओं की क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है। बैराजों और जलाशयों में जमा गाद को बड़े स्तर पर हटाया जा रहा है, जिससे जल भंडारण क्षमता और बिजली उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से न केवल ऊर्जा उत्पादन मजबूत होगा, बल्कि नदी प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
किश्तवाड़ में बन रही मेरुसुदार परियोजना को भी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद चिनाब नदी के प्रवाह नियंत्रण में भारत की क्षमता और मजबूत हो सकती है। इसी के साथ भारत ने पाकिस्तान को जल प्रवाह से संबंधित आंकड़े साझा करना भी बंद कर दिया है, जो 1960 से सिंधु जल संधि के तहत नियमित रूप से किया जाता रहा था।
उत्तर भारत के लिए नई जल परियोजनाओं की तैयारी
भारत अब दीर्घकालिक जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई नहर परियोजनाओं और जलाशय योजनाओं पर भी तेजी से काम कर रहा है। कई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है और उन्हें जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। योजना के तहत उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों को नई नहरों के माध्यम से जोड़ने की तैयारी है ताकि पूरे वर्ष सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
इसके अंतर्गत लगभग 130 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए ब्यास नदी के जल को गंगनहर से जोड़ने की योजना बनाई गई है। वहीं यमुना नदी को जोड़ने के लिए अलग नहर और लगभग 12 किलोमीटर लंबी सुरंग का प्रस्ताव भी सामने आया है। इन परियोजनाओं से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी और अंतरराष्ट्रीय कोशिशें
भारत के इन कदमों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान अब उन परियोजनाओं पर भी सवाल उठा रहा है जो फिलहाल विश्व बैंक की मध्यस्थता प्रक्रिया के दायरे में नहीं हैं। दूसरी ओर भारत ने पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिटेशन की कार्यवाहियों से दूरी बनाते हुए तटस्थ विशेषज्ञ की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान कई बार भारत को पत्र लिखकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील कर चुका है। हालांकि भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते। भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।”
ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी भारत का फोकस
भारत वर्ष 2026 तक जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इनमें चिनाब नदी पर बन रही पक्कलडुल परियोजना और किरू परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए भारत न केवल अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
बदलते समय के अनुसार संधि में संशोधन की मांग
भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि अब वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप नहीं रह गई है। जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, बढ़ती आबादी और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतों को देखते हुए संधि में संशोधन आवश्यक हो गया है। भारत का तर्क है कि यह समझौता बीसवीं सदी के मध्य की परिस्थितियों के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि आज की आवश्यकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं।
भारत चाहता है कि नई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संधि पर पुनर्विचार किया जाए, लेकिन पाकिस्तान इस प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा। भारत का मानना है कि यह रवैया स्वयं संधि की भावना और प्रावधानों के विपरीत है।
जल कूटनीति बनती जा रही नई रणनीतिक ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में जल संसाधन केवल विकास का मुद्दा नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक रणनीति और कूटनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे। भारत जिस तरह अपने जल संसाधनों के प्रबंधन और नियंत्रण को मजबूत कर रहा है, उसे दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ी रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सिंधु जल संधि को लेकर भारत का सख्त रुख अब केवल कूटनीतिक संदेश नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय नीति का संकेत माना जा रहा है।