यूरोपीय संघ, ब्राज़ील और फ्रांस के साथ हाल ही में हुए उच्चस्तरीय संवादों के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। दोनों देशों के संबंधों में पिछले महीनों में जो सुधार आया है, यह यात्रा उसे और आगे बढ़ा सकती है। भारत की बहुआयामी विदेश नीति के इस चरण में कार्नी का दौरा रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक साझेदारी और FTA की दिशा में निर्णायक कदम
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि भारत–कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता अगले सप्ताह शुरू हो सकती है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि कनाडा के साथ औपचारिक बातचीत की शुरुआत प्रधानमंत्री कार्नी के भारत आगमन के बाद संभव है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार FTA की प्रारंभिक शर्तें लगभग तय हैं और दोनों देश बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं। यह समझौता वर्तमान लगभग 30 बिलियन डॉलर के व्यापार को 2030 तक 50 बिलियन डॉलर से अधिक तक ले जाने में मदद कर सकता है।
निवेश, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी में गहराता सहयोग
कार्नी 27 फरवरी को मुंबई पहुँचने के बाद दो दिनों तक व्यावसायिक कार्यक्रमों, उद्योग जगत के नेताों, CEOs और कनाडाई पेंशन फंड प्रमुखों से मिलेंगे। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति, खासकर यूरेनियम और भारी कच्चे तेल से जुड़े समझौतों पर चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, फिनटेक, शिक्षा और अनुसंधान–नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए करार बनने की संभावनाएँ भी मजबूत हैं। CEO फोरम की संयुक्त बैठक दोनों देशों के उद्योग सहयोग को नई दिशा दे सकती है।
द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और ‘रीसेट’ की संभावना
कनाडा द्वारा हाल ही में स्पष्ट किया गया कि भारत अब उसके यहाँ होने वाले कुछ हिंसक अपराधों से संबंधित नहीं माना जाता, यह दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का संकेत है। यह बयान दोनों पक्षों को रिश्तों में ‘रीसेट’ करने का अवसर देता है। कनाडा अमेरिकी आर्थिक नीतियों की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है और ऐसे में भारत जैसे बड़े, स्थिर और उभरते बाज़ार के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी उसके लिए रणनीतिक आवश्यकता बनती जा रही है। पिछले वर्ष के दौरान संवाद और संपर्क बढ़ने से द्विपक्षीय विश्वास बहाल हुआ है।
02 मार्च को दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक और मुख्य एजेंडा
02 मार्च को हैदराबाद हाउस में होने वाली द्विपक्षीय बैठक में ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, कृषि, रक्षा, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, नवाचार और वैश्विक-क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को फिर से सक्रिय करने पर भी बात हो सकती है, जो 2023 के तनावपूर्ण माहौल के कारण स्थगित हो गया था। यदि इस यात्रा के दौरान CEPA के अधिकार क्षेत्र को अंतिम रूप दिया जाता है, तो भारत–कनाडा व्यापार संबंधों में एक बड़ा मोड़ आ सकता है।
साझेदारी का नया दौर और विस्तृत संभावनाएँ
प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और कनाडा रणनीतिक रूप से विश्वसनीय साझेदार की तलाश में है। यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और सामरिक समन्वय के लिए नए रास्ते खोल सकता है। आने वाले वर्षों में यह यात्रा भारत–कनाडा संबंधों की दिशा तय करने वाले निर्णायक पड़ाव के रूप में देखी जाएगी।
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