अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही छूट को खत्म करने का फैसला लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने स्पष्ट किया कि अब इस जनरल लाइसेंस को आगे रिन्यू नहीं किया जाएगा।
11 मार्च तक की खेपों के लिए थी राहत
यह छूट केवल उन तेल खेपों के लिए लागू थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थीं। अब आगे किसी भी देश को इस तरह की राहत नहीं मिलेगी।
भारत को मिली थी 30 दिन की विशेष छूट
अमेरिका ने 5 मार्च को भारत को 30 दिन की छूट दी थी, जिसके चलते भारत प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात कर रहा था। यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।
वैश्विक बाजार में बढ़ा दबाव
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पहले ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।
रूस से तेल आयात में तेजी
भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल आयात बढ़ाया है। मार्च में यह आंकड़ा करीब 1.98 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो जून 2023 के बाद सबसे अधिक है।
अप्रैल में आई गिरावट, पर वजह अलग
अप्रैल में आयात घटकर 1.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, लेकिन यह गिरावट मांग कम होने से नहीं, बल्कि रिफाइनरी में मेंटेनेंस के कारण आई है।
आगे क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक फारस की खाड़ी से सप्लाई में बाधा बनी रहेगी, भारत रूस से तेल खरीद जारी रख सकता है। हालांकि अमेरिकी फैसले के बाद आगे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।