राजधानी भोपाल में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बना 11 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक अब अपनी हालत पर सवाल खड़ा कर रहा है। जिस ट्रैक को कभी शहर की आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल पहचान के रूप में पेश किया गया था, आज वही ट्रैक अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार हो चुका है।
ट्रैक पर लग गई अवैध सब्जी मंडी
बोर्ड ऑफिस चौराहे से लेकर लिंक रोड नंबर-1 तक साइकिल ट्रैक के कई हिस्सों पर अब सब्जी और फल विक्रेताओं का कब्जा दिखाई देता है। सुबह के समय यह पूरा इलाका एक अस्थायी सब्जी मंडी में बदल जाता है, जहां ठेले, टेंपो और दुकानों की भीड़ साइकिल चालकों के रास्ते को पूरी तरह बाधित कर देती है।
साइकिल ट्रैक बना पार्किंग जोन
सिर्फ अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर इस ट्रैक का इस्तेमाल वाहनों की पार्किंग के रूप में भी किया जा रहा है। इससे साइकिल चलाने के लिए बनाए गए इस ट्रैक का मूल उद्देश्य लगभग खत्म हो गया है और लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
350 करोड़ की योजना पर उठे सवाल
इस 11 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक पर करीब 350 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसे राजधानी में सुरक्षित और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह परियोजना अपने लक्ष्य से भटकती नजर आ रही है।
भविष्य की योजनाओं का दावा
नगर निगम का कहना है कि साइकिल ट्रैक को सुधारने और विस्तार देने की योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार इसे आगे बढ़ाकर 23 किलोमीटर तक विकसित किया जाएगा और 207 किलोमीटर लंबी साइकिल ग्रीनवे परियोजना पर भी काम प्रस्तावित है। हालांकि जमीनी स्थिति को देखते हुए नागरिकों का कहना है कि पहले मौजूदा ट्रैक को अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है, तभी किसी विस्तार योजना का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।